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Home Opinion भ्रष्टाचार पर अंकुश की महती जिम्मेवारी

भ्रष्टाचार पर अंकुश की महती जिम्मेवारी

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यह संतोष की बात है कि भ्रष्टाचार के मामले में वैश्विक स्तर पर भारत की छवि में कुछ सुधार हुआ है. प्रसिद्ध संस्था ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ की सालाना रिपोर्ट में भारत पिछले वर्ष के 94वें स्थान से आगे बढ़ कर 85वें स्थान पर आ गया है. यह भी महत्वपूर्ण है कि 18 वर्षो के बाद चीन इस मामले में 100वें स्थान के साथ भारत से काफी पीछे है.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशन बीते दो वर्षो में विभिन्न संस्थाओं द्वारा उपलब्ध करायी गयीं ठोस सूचनाओं व सर्वेक्षणों के आधार पर हर वर्ष भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक जारी करता है. पिछले दो-तीन वर्षो के परिदृश्य पर गौर करें तो इस दौरान देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई आंदोलन हुए हैं. अन्ना हजारे और केजरीवाल के आंदोलनों के जरिये बड़ी संख्या में जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया. इस दौरान कुछ संस्थाओं व मीडिया की सक्रियता से कई बड़े घोटाले उजागर हुए और देश की बड़ी अदालतों ने सरकारों को उनकी लापरवाही के लिए आड़े हाथों लिया. कई बड़े राजनेता, नौकरशाह व कारोबारी जेल भेजे गये. रोजमर्रा के कामों में भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर ही दिल्ली की जनता ने पिछले विस चुनाव में केजरीवाल की पार्टी में भरोसा जताया था.
हालांकि, वे महज 49 दिन ही सरकार चला पाये, लेकिन इस दौरान भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कई कोशिशें कीं, जिनमें जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित की गयी. इस साल लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत में भी यूपीए सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का क्षोभ बड़ा कारक था. सूचना के अधिकार समेत विभिन्न प्रावधानों/माध्यमों के जरिये जनता ने भी सरकारी भ्रष्टाचार को सामने लाने का काम किया है. जनता में बढ़ी जागरूकता के कारण ही भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा बना और भ्रष्ट प्रवृत्तियों पर कुछ हद तक अंकुश लगा है, जिसकी एक अभिव्यक्ति इस रिपोर्ट में हुई है.
हालांकि बीते साल की तुलना में भारत को सिर्फ दो अंक अधिक मिले हैं और 100 में से उसका वर्तमान प्राप्तांक सिर्फ 38 है. चीन के 36 अंक हैं, जबकि कम भ्रष्ट छवि वाले शीर्ष 60 देशों के अंक 49 से 92 के बीच हैं. जाहिर है, इस मोरचे पर अपने देश को अभी बहुत कुछ करना बाकी है. यह महती जिम्मेवारी भ्रष्टाचार रोकने के वादे के साथ सत्ता में आयी मोदी सरकार पर है.
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