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शुभ है महिलाओं की यह भागीदारी

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झारखंड में पहले चरण का मतदान हो गया. गर्व करने की बात यह है कि महिलाओं ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भवनाथपुर, गढ़वा, हुसैनाबाद, छतरपुर, विश्रमपुर, डालटेनगंज, पांकी में पुरुषों की अपेक्षा महिला मतदाताओं का प्रतिशत ज्यादा रहा. यानी महिला मतदाता अपने अधिकार के प्रति ज्यादा जागरूक हैं.
महिलाओं की प्रशंसा इसलिए और ज्यादा करनी चाहिए क्योंकि घर के कामकाज करने के साथ-साथ इन महिलाओं ने मतदान किया. एक समय था जब वोट पर पुरुषों का कब्जा होता था. महिलाएं वोट देने के लिए कम निकलती थीं. अब समय बदल गया है और यह उसी की झलक है. यह परिवर्तन एक दिन में नहीं हुआ है. लगातार प्रयास चलता रहा है. महिलाएं अब समझ चुकी हैं कि जब संविधान ने उन्हें मतदान करने का अधिकार दिया है तो इसका वे उपयोग करेंगी और बेहतर प्रत्याशी चुनेगी. देश की आबादी में महिलाओं की संख्या लगभग आधी है, इसलिए महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
राजनीतिक दल टिकट बांटने में अब भी भेदभाव कर रहे हैं, लेकिन जिस तरीके से जनप्रतिनिधि चुनने में महिलाएं आगे आ रही हैं, वह इनकी राजनीतिक चेतना को दर्शाता है. महिलाओं के आगे आने का एक और लाभ होगा. मतदान के दौरान कुछ जगहों पर राजनीतिक दल के नेता वोट खरीदेने का प्रयास करते हैं. पुरुष मतदाता आसानी से झांसे में आ जाते हैं, लेकिन महिला मतदाता ज्यादा सजग होती हैं. इसलिए जब मतदान में अधिक से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं, तो तय मानिए कि दबाव और लोभ का असर भी कम हो रहा है.
चुनाव में भाग लेना, राजनीति में महिलाओं के आगे आने की पहली सीढ़ी है. अब तो कई राज्यों में पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण मिला है. जिस तेजी से महिलाएं मतदान करने के लिए आगे आ रही हैं, उसी तरीके से वे भविष्य में सक्रिय राजनीति में भी आगे आयेंगी. इससे बड़ा बदलाव दिखेगा. अनेक ऐसे मुद्दे हैं जो पुरुषों की तुलना में महिला प्रतिनिधि बेहतर तरीके से निबटा सकती हैं. राजनीति की सफाई में भी यह सहायक सिद्ध हो सकता है. जो उत्साह महिलाओं ने पहले चरण में दिखाया है,उसे आगे भी जारी रखना होगा.
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