कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास

कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी छोड़े हुए तीस बरस हो गये. इन कश्मीरी पंडितों के घाटी में सुरक्षित पुनर्वास के गंभीर प्रयास होने ही चाहिए. कश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय के लिए भाजपा अन्य दलों से कहीं अधिक जिम्मेदार है. जब कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार हो रहे थे, तब केंद्र में वीपी सिंह सरकार को […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 22, 2020 6:48 AM
कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी छोड़े हुए तीस बरस हो गये. इन कश्मीरी पंडितों के घाटी में सुरक्षित पुनर्वास के गंभीर प्रयास होने ही चाहिए. कश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय के लिए भाजपा अन्य दलों से कहीं अधिक जिम्मेदार है.
जब कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार हो रहे थे, तब केंद्र में वीपी सिंह सरकार को भाजपा बाहर से समर्थन दे रही थी, लेकिन भाजपा को उस समय राम मंदिर के लिए केवल अपनी रथयात्रा की चिंता थी. भाजपा उस समय केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर कश्मीरी पंडितों के हित में आवाज उठा सकती थी. राज्य के राज्यपाल जगमोहन भी उसी विचारधारा के थे. साल 1998 से 2004 तक केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने भी कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए कोई योजना नहीं बनायी. मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल में भी इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हो पाया. अब आवश्यक हो गया है कि इनके हितों की रक्षा की जाये. भाजपा को अपनी भूलें सुधारने का यह स्वर्णिम अवसर है. उसे कश्मीरी पंडितों के जख्मों पर मरहम लगाने ही होगा.
सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली