कब बहुरेंगे नदियों के दिन

भारत नदियों का देश है और इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है, मगर जो मौजूदा स्थिति है, वह निराश करती है. सवाल यही उठता है कि ऐसा हम क्यों होने दे रहे हैं? कुछ दिनों पहले पटना में आयी बाढ़ के बाद जब गंगा के पानी का टेस्ट किया गया, तो उसके परिणाम बहुत खराब आये. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 17, 2019 1:00 AM
भारत नदियों का देश है और इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है, मगर जो मौजूदा स्थिति है, वह निराश करती है. सवाल यही उठता है कि ऐसा हम क्यों होने दे रहे हैं?
कुछ दिनों पहले पटना में आयी बाढ़ के बाद जब गंगा के पानी का टेस्ट किया गया, तो उसके परिणाम बहुत खराब आये. उत्तर प्रदेश के भी कई शहरों में गंगा का पानी प्रदूषित है, जहां पीने लायक तो दूर, छूने तक से इन्फेक्शन का खतरा बताया गया. पिछले दिनों खबर मिली कि नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा की सफाई के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी ‘जल जीवन हरयाली’ अभियान शुरू करके अच्छा किया, मगर क्या सिर्फ इतने से या सिर्फ सरकार के चाहनेभर से देश की नदियों का जीर्णोद्धार हो जायेगा? नहीं. जब हम सुधरेंगे, तभी नदियों के दिन बहुरेंगे. आज नदियों के जीर्णोद्धार के लिए ठोस पहल जरूरी है.
अमर कुमार यादव, धनबाद, झारखंड