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राष्ट्र-संत बनाम संत का राष्ट्र

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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
कोई-कोई संत इतने सम्मानित होते हैं कि उन्हे राष्ट्र-संत मान लिया जाता है और कोई कोई संत इतने नोटवान होते हैं कि अपने लिए एकाध राष्ट्र खरीद लेते हैं.खबर है कि भारत से फरार एक संत ने एक राष्ट्र ही खरीद लिया है, कोई टापू वगैरह खरीदकर उसे राष्ट्र घोषित कर दिया है. इस राष्ट्र का नाम कैलासा रख दिया है. संत राष्ट्राध्यक्ष घोषित कर सकते हैं खुद को. कुछ समय बाद यह भी संभव है कि यही राष्ट्राध्यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस की परेड में विदेशी अतिथि बनकर आ जायें. तस्कर, आतंकी भारत में वारदात करके पाकिस्तान में शरण लेने को भटकते हैं, वहीं संत वारदात करके जाते हैं और पूरा राष्ट्र अपने नाम कर देते हैं.
संत राष्ट्र खरीदने की हैसियत रखता है, यह खबर आश्वस्तकारी है, वरना तो खबर यह थी कि महाघोटाली नीरव मोदी ने भी कहीं कोई राष्ट्र खरीद लिया है, बाद में पता लगा कि वह समूचा राष्ट्र ना खरीद पाया, किसी राष्ट्र का पासपोर्ट भर खरीद पाया है. संतत्व में प्रचंड तेज होता है.
एक बाबा ने हरियाणा में लगभग राष्ट्र बना लिया था, अपनी फैक्टरियां, अपने अस्पताल, अपने स्कूल. बस करेंसी भारत की चल रही थी. बाद में यह बाबाजी किन्हीं आरोप में धर लिये गये. थोड़ा और बाहर रुक गये होते, तो अपनी करेंसी भी बना डालते. रिजर्व बैंक अगर इजाजत ना देता, तो अपना रिजर्व बैंक ही बना लेते. भारतीय बाबाओं का तेज-प्रताप अनंत है.
पाकिस्तान विकट आर्थिक संकट में है, तमाम देशी-विदेशी पाक संपत्तियां बिक रही हैं. क्या पता एक दिन कोई संत पूरा पाकिस्तान ही खरीद लाये, वह भी एक दिन के चढ़ावे से. पाकिस्तान तू समझता क्या है कि तेरे रेट चाहे जितने चढ़ जायें, हमारे संतों के एक दिन के चढ़ावे में पाकिस्तान खरीदा जा सकता है.
पाकिस्तान की खरीद बेच से वहां की पब्लिक को कुछ ना मिलने का, जो मिलना है, नेता और अफसरों को ही मिलना है. पाकिस्तान में एक नेता दूसरे नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सत्ता में आता है. इमरान खान नवाज शरीफ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सत्ता में आये थे पाकिस्तान में, फिर इमरान खान ने नवाज शरीफ को हवाई जहाज में बिठाकर पाकिस्तान से भगा दिया. अलबत्ता पाकिस्तान इतना अमीर मुल्क ना हुआ कि वहां के बाबा और नेता कोई मुल्क खरीद सकें. यह फख्र तो भारत को हासिल है कि यहां के संत भी अपना राष्ट्र खरीद लेते हैं.
मैं उस दृश्य की कल्पना कर रहा हूं, जब कोई ठल्लोल बाबा बता रहे हैं कि समूचा पाकिस्तान उन्हीं का आश्रम है और पाकिस्तान की जनता उन्हीं के भंडारे से खाने-पीने का इंतजाम करती है. यहां ऐसे-ऐसे संत पड़े हैं भारतभूमि में, जिनकी संपदा से मुल्क के मुल्क खरीदे जा सकते हैं और उन तमाम मुल्कों में भंडारा चलाया जा सकता है.
संत बन जाये, तो बंदा राष्ट्र खरीद सकता है. आम आदमी को तो प्याज खरीदने में ही कष्ट है. आइये संत बनने की दिशा में उन्मुख हों और कोई राष्ट्र खरीदने की दिशा में आगे बढ़ें.
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