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स्वास्थ्य सेवा में तकनीक

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डिजिटल तकनीक हमारे रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा होती जा रही है. प्रशासन, बैंकिग, उद्योग, खेती आदि अनेक क्षेत्रों में इससे सहूलियत बढ़ी है. अब आधुनिक तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में भी कोशिशें हो रही हैं.

नीति आयोग ने नये भारत के लिए उत्कृष्ट स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए ठोस सुधारों की वकालत करते हुए एक रिपोर्ट तैयार की है. संसाधनों की कमी से जूझती हमारी स्वास्थ्य सेवा पर बड़ी आबादी के इलाज का भार है. गांवों और दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों की भी कमी है. शहरों में जो सुविधाएं हैं, वे महंगी हैं. भारत सरकार ने इस दिशा में अनेक पहलें की हैं और आगामी दिनों में समुचित निवेश की योजना भी है. इन प्रयासों की प्राथमिकता गांवों और गरीबों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना है. यदि ऐसे कार्यक्रमों में आधुनिक तकनीकी क्षमताओं को भी शामिल कर लिया जाए, तो अच्छा उपचार उपलब्ध कराने के साथ खर्च में भी बचत की जा सकती है.

नीति आयोग के अनुसार, सक्षम कंप्यूटरों के जरिये रोगी की स्थिति और संभावित उपचार के आकलन की व्यवस्था की जा सकती है. इससे बीमार और डॉक्टर दोनों के समय की बचत होगी तथा साधारण रोगों के लिए अस्पताल जाने की जरूरत भी नहीं होगी. अगर लक्षण किसी गंभीर बीमारी को इंगित करें या डॉक्टर के मदद की दरकार हो, तो कंप्यूटर इसकी जानकारी दे देगा. हर रोगी की जरूरत के हिसाब से दवाइयों का सुझाव मिलना भी संभव है. दुर्भाग्य से सही समय पर रोग की पहचान न होने और दवा न मिलने के कारण संक्रामक बीमारियों से ही लाखों मौतें हो जाती हैं.

सालभर की कवायद के बाद तैयार की गयी आयोग की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवा को विकसित करने के लिए एक व्यापक तंत्र बनाना होगा, जिससे सेवा और वित्त का एक एकीकृत संजाल तैयार हो सके. यह एक चुनौतीपूर्ण काम है तथा ठोस नीतियों व निवेश से ही इसे अमली जामा पहनाना संभव है. अनेक देश ऐसी प्रणाली के विस्तार में लगे हैं.

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भी डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं. भारत में ऐसे कुछ अस्पताल हैं, जो जांच और इलाज के लिए सूचना तकनीक के साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. टेलीमेडिसिन, रोबोटिक्स और डिजिटल विश्लेषण का दायरा बढ़ता जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी धीरे-धीरे दस्तक देने लगा है. हर कस्बे और शहर में सभी रोगों के विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करा पाना संभव नहीं है.

ऐसे में तकनीक के द्वारा न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा सकती हैं. इसी तरह से कहीं दूर बैठा कोई सर्जन डिजिटल स्क्रीनों से स्थानीय सर्जन को निर्देशित कर सकता है. ऐसा सर्जन रोबोटिक्स से ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकता है. उम्मीद है कि बदलते समय के अनुरूप सरकार नीति आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन कर इस दिशा में अग्रसर होगी.

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