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धारदार विदेश नीति

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संतुलन और समानता संप्रभु राष्ट्रों के वैश्विक तंत्र का एक आधारभूत सिद्धांत है. इसके अंतर्गत सभी राष्ट्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे एक-दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करें. जब कोई अंतर्विरोध या तनाव की स्थिति पैदा होती है, तो उसे वार्ता और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का विकल्प होता है. विवादों का निपटारा अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा द्विपक्षीय संवाद से भी किया जाता है.
इस व्यवस्था में एक अंतर्निहित तत्व यह भी है कि कोई देश किसी अन्य देश के आंतरिक मामलों में निराधार हस्तक्षेप न करे तथा ऐसा कोई व्यवहार न करे, जिससे उसकी वैधानिक संप्रभुता को चोट पहुंचे. कश्मीर मसले पर तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाकर इस वैश्विक सैद्धांतिकी का उल्लंघन किया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से तुर्की के राष्ट्रपति और मलेशिया के प्रधानमंत्री ने जैसी आक्रामकता का प्रदर्शन किया है, वह आपत्तिजनक होने के साथ कूटनीतिक मर्यादाओं के विपरीत भी है. ऐसा तब हुआ है, जब इन देशों के साथ भारत के संबंध सामान्य हैं तथा वाणिज्यिक लेन-देन का भी सिलसिला है.
भारत अपनी गरिमा को बनाये रखते हुए ऐसी आक्रामकताओं को अनदेखा भी कर सकता था, लेकिन इससे इन प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलने का अंदेशा भी होता है. तुर्की और मलेशिया के वक्तव्यों को पक्षपातपूर्ण और अनुचित बताते हुए भारत ने पहले ही कह दिया था कि मैत्रीपूर्ण संबंधों के होते हुए भी आंतरिक मामलों पर इन देशों का ऐसा रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासभा की बैठक के दौरान आर्मेनिया और साइप्रस के नेताओं से भेंट कर तुर्की को करारा संकेत दे दिया था. इन देशों के साथ तुर्की का लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहा है. फिर भी, दोनों देशों की ओर से ऐसे वक्तव्य आते रहे हैं. ऐसे में भारत ने भी कड़ा रुख अपनाने का निर्णय ले लिया है. पाकिस्तान से बढ़ते गठजोड़ को देखते हुए तुर्की को होनेवाले रक्षा निर्यात में कटौती की जा रही है.
उत्तर-पूर्व सीरिया में उसकी सैन्य कार्रवाई पर भी भारत ने चिंता जतायी है. तुर्की जानेवाले भारतीय पर्यटकों से सावधान रहने की सलाह दी गयी है. हाल के वर्षों में तुर्की में भारतीय पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है. सूत्रों की मानें, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित तुर्की यात्रा भी स्थगित कर दी गयी है. भारतीय आयातकों ने मलेशिया से ताड़ के तेल के आयात को रोक कर इंडोनेशिया से खरीदने का निर्णय लिया है. इस कारण अक्तूबर के पहले सप्ताह से मलेशियाई तेल के भाव में गिरावट का रुख बना हुआ है.
ऐसे संकेत हैं कि भारतीय आयातक एक नवंबर से खरीद का कोई नया समझौता भी नहीं करेंगे. वाणिज्य-व्यापार किसी भी देश की विदेश नीति का अभिन्न अंग हैं. ऐसी ठोस पहलों से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जो देश हमारे हित के आकांक्षी नहीं हैं, उनसे आर्थिक संबंध बनाये रखने का उसका कोई इरादा नहीं है. यह सोच भारतीय विदेश नीति में नयी धार का परिचायक है.
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