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धारा में विचार

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार
puranika@gmail.com
चालू विवि ने राजनीतिक विचारधारा विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया, इसमें प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है- राजनीतिक विचारधारा टॉपिक में तीन शब्द हैं- राजनीतिक, विचार और धारा. राजनीतिक यानी सत्ता, यानी कुरसी, यानी पावर, यानी पेट्रोल पंप, यानी राशन की दुकानें, यानी बड़े ठेके, यानी मौके के प्लाट, जिन रास्तों से यह सब हासिल होता है, उन्हें राजनीतिक रास्ते कहते हैं.
चतुर सुजान कहते हैं कि जिस भी पार्टी के साथ रहकर यह सब हासिल हो, उसी पार्टी के साथ हो जाना चाहिए. राजनीति का उद्देश्य यही सब हासिल करना होता है. इसलिए हमने देखा है कि अलां जी फलां पार्टी के मुख्य प्रवक्ता थे, और फिर उसकी विरोधी पार्टी के भी मुख्य प्रवक्ता हो गये, फिर दोनों की विरोधी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हो गये.
पहले उनके पास राशन की एक दुकान थी, फिर दो पेट्रोल पंप भी हो गये. फिर शहर में आठ प्लाट और कालांतर में बीस और पेट्रोल पंप हुए उनके. राजनीति उनको ऐसी फली कि पेट्रोल पंप की धार उनके यहां गिरती रही. मुल्क के कई पेट्रोल पंपों का गहन विश्लेषण किया जाये, तो साफ हो जायेगा कि राजनीति का ताल्लुक विचार से भले ही ना हो, पर धारा से तो जरूर है. कायदे की राजनीति हो जाये, तो बंदा अपने ठिकाने पर पेट्रोल की धार कायदे से गिरा सकता है.
टॉपिक का एक और शब्द है- विचार. विचार बहुत हवाई शब्द है. विचार हवा की तरह होते हैं. हवा आज इधर की बहती है, कल उधर की बह सकती है, परसों उधर की. हवा और विचार दोनों बहते ही अच्छे होते हैं. जिनके विचार रुक जाते हैं, उनका विकास भी रुक जाता है.
एक जमाने में संजय निरूपम महाराष्ट्र में शिवसेना के फायरब्रांड नेता थे, फिर वह कांग्रेस के नेता हो गये. विकास बहुत तेजी से हुआ. अब उनके विचार फिर बदलते से प्रतीत होते हैं, हो सकता है कि वह और बड़ा पद वगैरह कहीं और हासिल कर लें.
स्मार्ट बंदा वही है, जो अपने पुराने विचार को धारा में बहाने को तैयार रहे और एक झटके में नयी स्थितियों से फायदा उठाने की प्रतिबद्धता दिखाये. विचार को धारा में बहाने में जिसने अड़चन दिखायी, वह खुद बह जाता है.
हरियाणा कांग्रेस के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा को लगा कि आलाकमान उनकी खास सुन नहीं रहा है, तो उन्होने कुछ ऐसी बातें कहना शुरू कीं, जिनसे आलाकमान के कान खड़े हुए और आलाकमान ने हरियाणा की पूरी कमान हुड्डा को थमा दी. अब हुड्डा एकदम प्रतिबद्ध अनुशासित सिपाही दिखायी दे रहे हैं. पर इस बात से दूसरे कांग्रेसी नेता उखड़ गये हैं और वह अपने कांग्रेसी विचारों को धारा में बहाने में जुट गये हैं.
जब चुनाव ठीक सामने हों, तो धारा में विचार बहाकर कहीं जल्दी से जाया नहीं जा सकता. इससे यह शिक्षा मिलती है कि अगर विचारों को धारा में सही समय पर ना बहाया जाये, तो नुकसान हो सकता है. जो नेता विचारों को धारा में बहाने में विलंब करते हैं, उनके खुद के बहने में विलंब ना होता.
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