पक्ष हो या विपक्ष,भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए
अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है. शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
September 26, 2019 6:54 AM
अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होनेवाला है. इसको लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गयी है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा जाता है. आलोचना का स्तर नीतियों पर आधारित नहीं होकर व्यक्तिगत हो जाता है.
शब्दों की मर्यादा, परिष्कृत भाषा व शालीनता का ख्याल नहीं रखने से सच्ची बात भी उपहास का केंद्र बन जाती है. इस पर कोई गंभीर नहीं होता है. नेताओं को चाहिए कि उनके शब्दों के उच्चारण मानक हिंदी के करीब रहे. यद्यपि यह संभव न भी हो तो प्रयास दिखना तो चाहिए. नेताओं में भी मेधा की कमी नहीं हैं. गांधी, जयप्रकाश नारायण, श्रीबाबू, अनुग्रह बाबू, जग जीवन राम, इसी धरती की तो उपज हैं.
मुकेश कुमार मनन, पटना
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