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हिंदी के प्रचार में सुंदरी

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

हिंदी का सीजन हिंदी दिवस से शुरू हो गया है. फिर दो अक्तूबर से गांधी का सीजन शुरू हो जायेगा. होशियार हिंदी से भी कमाते हैं और गांधी से भी. गांधी बहुतों के काम आते हैं नेताओं के भी और सुंदरियों के भी. एक हिंदी सेवी ने हिंदी दिवस पर चिंता व्यक्त की- अब शुद्ध हिंदी खत्म हो रही हैं. मैंने कहा दीपिका पादुकोण या कैटरीना के लेवल की सुंदरी शुद्ध हिंदी की ब्रांड एंबेसडर बन जाए, तो शुद्ध हिंदी जम जायेगी.

सुंदरी ब्रांड एंबेसडर हो तो हींग से हिंदी तक जमा देती है. सुंदरी बहुत काम आती है. विश्व सुंदरी होते ही सुंदरियां तमाम विषयों की ज्ञानी हो जाती हैं. एक भूतपूर्व भारतीय विश्व सुंदरी इलायची की गुणवत्ता की भी एक्सपर्ट हुईं और कौन-से ब्रांड की इलायची खाने से अच्छाई की चमक आ जाती है, वह बताती हैं. हालांकि, चेहरे की चमक के लिए दूसरे उपाय भी सुंदरियां बताती रहती हैं. पब्लिक मान जाती है, भाई सुंदरी है, तो जानती होगी हर बात. ऐसे ही कोई सुंदरी न बनता.

सुंदरियां गांधी पर भी बोलती हैं. एक विश्व सुंदरी ने गांधी को अपना आदर्श बताया था. समझ न आया किस अर्थ में. गांधी जी बहुत कम कपड़ों में काम चला लेते थे, पर उसकी वजह दूसरी थी. गांधी देश के आखिरी आदमी से भी अपना तादाम्य करना चाहते थे, पर तमाम सुंदरियां देश के आखिरी आदमी को भी पान मसाला बेच लेना चाहती हैं, ऐसे आखिरी आदमी से अपना तादाम्य बनाना चाहती हैं. सुंदरी थोड़ी फेमस होते ही ज्ञानी हो जाती है.

सुंदरी और गांधी- इनका प्रयोग मार्केटिंग में समान स्तर पर होता है. कोई भी नेता बिना गांधी का नाम लिये बाजार में नहीं उतरता है. लगभग हर प्राेडक्ट सुंदरी के सहारे ही बाजार में कूदता है. पद्मावती फेम दीपिका पादुकोण एक बैंक की खूबियों के बारे बताती हैं. हालांकि बैंकिंग एक्सपर्ट बताते हैं कि इस बैंक ने नोटबंदी के दिनों में कई घपलात्मक काम किये, पर बैंकिंग एक्सपर्ट शायद कम जानते हैं बैंकों के बारे में.

दीपिका जी उस टेलीकाॅम नेटवर्क को भी श्रेष्ठ नेटवर्क बता रही थीं, जहां कस्टमर की सुनवाई नहीं ही होती है. सुंदरी सब जानती है, ऐसा गहन विश्वास भारतीय पब्लिक करती है. इसी गहन विश्वास के आधार पर सुंदरियां इलायची से लेकर टायर से लेकर बैंक से लेकर टेलीकाॅम नेटवर्क से लेकर मोबाइल तक के बारे में ज्ञान बांटती हैं और हम सब लेते हैं.

सुंदरी के बिना कुछ भी नहीं बिकता, मैं डरता हूं उस दृश्य को सोच कर जब गांधीवाद की मार्केटिंग के लिए भी सुंदरियों के सहारे की जरूरत पड़ेगी. सपने में एक डरावना सीन आता है कि गांधी स्टेज से कह रहे हैं कि मेरी सुनो, मेरी शिक्षाओं को सुनो, देखो फलां-फलां सुंदरियों ने मेरी बात करके, मेरे वचनों को कोट करके फलां-फलां ब्यूटी कांटेस्ट जीती है.

गांधीजी से सवाल पूछा जा रहा है- पर वो सुंदरियां हैं कहां, जो तुम्हारी फाॅलोअर थीं? जवाब आयेगा- वे सौंदर्य साबुन से लेकर मोबाइल फोन बेच रही हैं. अब शुद्ध हिंदी को भी उच्च स्तरीय सुंदरी का इंतजार है.

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