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जुर्माना ज्यादा तो नहीं

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भारतीय सड़कों पर हर रोज औसतन 400 मौतें होती हैं. दुर्घटनाओं की संख्या पांच लाख से अधिक है और सालाना मौतों का आंकड़ा डेढ़ लाख के करीब है. यदि इन आंकड़ों की तुलना अन्य देशों से करें, तो भारत पहले पायदान पर नजर आता है. अपेक्षाकृत कमतर सड़कों और बेतरतीब ट्रैफिक को देखते हुए यह एक बेहद चिंताजनक स्थिति है. दुर्घटनाएं रोकने और सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने वाहन अधिनियम के प्रावधानों को कठोर बनाया है. सड़क नेटवर्क के विस्तार और वाहनों की संख्या में वृद्धि की पृष्ठभूमि में इस बदलाव की जरूरत थी.
संशोधित कानून इस महीने से लागू हो गया है, लेकिन यातायात नियमों को तोड़ने और जरूरी कागजात नहीं रखने पर लग रहे जुर्माने की भारी-भरकम रकम से लोगों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है. हजारों से लेकर लाख-डेढ़ लाख रुपये तक के जुर्माने की खबरें देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही हैं. अनेक राज्यों में अभी इस कानून को लागू नहीं किया गया है तथा कुछ राज्यों में संशोधन पर विचार चल रहा है. गुजरात पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां कई उल्लंघनों के लिए तय जुर्माने की रकम में कटौती की गयी है. लोगों की शिकायतों के मद्देनजर यह एक सराहनीय कदम है.
यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ गंभीर गलतियों के लिए कानून में तय जुर्माने को राज्य सरकारें नहीं घटा सकती हैं. ऐसी गलतियों में शराब पीकर गाड़ी चलाना, नाबालिगों द्वारा चालन, लाल बत्ती पार करना आदि शामिल हैं. यह बिल्कुल उचित प्रावधान हैं, लेकिन मामूली उल्लंघनों पर रियायत पर विचार किया जाना चाहिए. यह भी उल्लेखनीय है कि इस कानून में सिर्फ जुर्माने ही नहीं बढ़ाये गये हैं, बल्कि दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायलों को समुचित उपचार सुनिश्चित करने के उपाय भी किये गये हैं.
चालक लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है. फर्जी लाइसेंस और दोषी चालकों पर रोक के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंसधारकों का एक डेटाबेस भी बनाया जाना है. वाहन निर्माताओं द्वारा निर्धारित मानदंडों के सही पालन के लिए नये नियम बने हैं. पीड़ितों के मुआवजे में भी वृद्धि की गयी है तथा सड़क के हर उपयोगकर्ता के लिए बीमा की व्यवस्था है. तमाम प्रावधानों के समुचित आकलन के आधार पर ही इस कानून का मूल्यांकन होना चाहिए तथा भारी जुर्माने के हवाले से इसकी असंतुलित आलोचना से बचा जाना चाहिए.
यह तथ्य भी देखना चाहिए कि सभी दुर्घटनाओं का कारण चालक नहीं होते. बदहाल सड़कों तथा उनके निर्माण की तकनीकी व इंजीनियरिंग के नियमों की अनदेखी से भी दुर्घटनाएं होती हैं. स्वागतयोग्य है कि सरकार ने इस संबंध में आवंटन बढ़ाने के साथ कानूनी प्रावधान भी किया है. ऐसे में गंभीर पहलुओं पर ध्यान देते हुए साधारण ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने को जेब के अनुकूल बनाया जाना चाहिए. साथ ही, जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी हों और नागरिक भी जिम्मेदार बनें.
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