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बढ़ते डिजिटल विज्ञापन

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बीते वित्त वर्ष में डिजिटल विज्ञापनों पर कर से सरकार को 939 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई है. यह वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में 59 प्रतिशत अधिक है. रिपोर्टों के आकलन के अनुसार, 2018-19 में भारतीय कारोबारियों ने कम-से-कम 15,650 करोड़ रुपये के विज्ञापन फेसबुक और गूगल जैसे डिजिटल मंचों पर दिये थे.

उल्लेखनीय है कि ऐसे मंचों पर लगे विज्ञापनों पर कर/शुल्क लगाने की शुरुआत जून, 2016 में हुई थी और तब यह नियमन हुआ था कि कारोबारी भुगतान के समय ही छह प्रतिशत कर काटकर जमा करा देंगे. डिजिटल मंचों के लाभ पर कर वसूलना आसान नहीं है, क्योंकि इनमें से बहुत सी कंपनियां भारत में पंजीकृत नहीं हैं और वे अपनी कमाई को देश से बाहर की किसी इकाई से जोड़कर दिखा सकती हैं.
ऐसे में भुगतान के समय ही निर्धारित शुल्क का काटा जाना एक प्रभावी उपाय है. देश के बाहर से संचालित डिजिटल मंचों पर कर लगाने, इ-कॉमर्स कंपनियों के नियमन, भारतीय उपभोक्ताओं के डेटा देश में ही संरक्षित करने तथा डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी सरकार ने पहलकदमी की है. डिजिटल कंपनियों और उद्यमियों के साथ देश के भीतर तथा व्यापारिक मंचों पर देश के बाहर सरकार लगातार बात कर रही है.
उम्मीद है कि धीरे-धीरे संबंधित नियमों की घोषणाएं होंगी. हमारे देश की मौजूदा डिजिटल अर्थव्यवस्था लगभग 200 अरब डॉलर की है और 2025 तक इसके 800 अरब डॉलर से एक ट्रिलियन डॉलर के बीच होने का अनुमान है. स्मार्टफोन और इंटरनेट के तेज विस्तार की गति को देखते हुए आर्थिकी के इस क्षेत्र की बढ़त से रोजगार, आमदनी और राजस्व को बड़ा आधार मिल सकता है.
कुछ महीने पहले आये एसोचैम और प्राइसवाटर कूपर के एक अध्ययन के अनुसार, 2017 में स्मार्टफोन इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 46.8 करोड़ थी, जिसके 2022 तक 85.9 करोड़ होने की संभावना है. स्मार्टफोन की संख्या में बढ़त का एक बड़ा कारण ऐसे फोन और इंटरनेट का सस्ता होना है. इंटरनेट की गति लगातार बढ़ रही है और दूर-दराज व देहातों में भी नेटवर्क का विस्तार हो रहा है.
बाजार पर शोध करनेवाली एजेंसी कांटर आइएमआरबी का कहना है कि इस वर्ष भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 62.7 करोड़ पहुंच जायेगी. फिलहाल यह तादाद 56.6 करोड़ है. ऐसे में डिजिटल विज्ञापनों से हासिल कर की मात्रा बहुत कम है. यदि डिजिटल अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आती है और बाहर से संचालित कंपनियां ईमानदारी से अपने हिसाब का ब्यौरा देती हैं, तो इस रकम में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
इस संबंध में एक चुनौती यह निर्धारित करना भी है कि किस तरह के विज्ञापन को कर के दायरे में लाया जाना चाहिए. इस पर जल्दी समुचित नियमन करने की जरूरत है, ताकि भारतीय कारोबारियों या अन्य इकाइयों के विज्ञापन की कमाई पर ठीक से कर संग्रहण किया जा सके, अन्यथा यह धन विदेशी तिजोरियों में जाता रहेगा.
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