संपर्क टूटा है, संकल्प नहीं

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव अपने आप में अनछुआ है. आज तक कोई मानव निर्मित विमान वहां नहीं पहुंच पाया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) द्वारा निर्मित चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हुआ. इसके बाद रोवर व लैंडर दोनों भाग ऑर्बिटर से अलग हो गये. सतह पर उतरते समय गति पर नियंत्रण न […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 9, 2019 4:35 AM

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव अपने आप में अनछुआ है. आज तक कोई मानव निर्मित विमान वहां नहीं पहुंच पाया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) द्वारा निर्मित चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हुआ. इसके बाद रोवर व लैंडर दोनों भाग ऑर्बिटर से अलग हो गये. सतह पर उतरते समय गति पर नियंत्रण न होने के कारण चंद्रमा की सतह से दो किमी ऊपर लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया.

फिर भी चंद्रयान-2 मिशन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. ऑर्बिटर चंद्रमा संबंधित कई जानकारी हमें अगले एक वर्ष तक देता रहेगा. विक्रम के सही तरीके से लैंड न होने व संपर्क टूट जाने से निराश इसरो चीफ प्रधानमंत्री के समक्ष भावुक हो गये, तब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें स्नेह से गले लगा लिया.
वास्तव में यह विश्वास व संबल ही इसरो को आज इस मुकाम तक ले जा पाया है. पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों पर गर्व करता है. आज अंतरिक्ष विज्ञान में हम विश्व में सबसे आगे है. लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा होगा, हमारा संकल्प नहीं टूटा है. एक बार फिर नयी ऊर्जा के साथ इसरो आगे बढ़ेगा.
मंगलेश सोनी, धार, मध्य प्रदेश