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स्वच्छता को प्राथमिकता

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प्रतिष्ठित संस्था बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मानित करने का निर्णय स्वच्छ भारत अभियान के संकल्प एवं उसकी उपलब्धियों का सम्मान है. पांच वर्ष पहले उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में खुले में शौच की प्रवृत्ति को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था.
दो अक्तूबर, 2014 को जब इस पहल का प्रारंभ हुआ था, तब देश के मात्र 38.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास शौचालय की सुविधा थी. वर्ष 2011 के जनगणना के आंकड़ों में यह संख्या केवल 32 प्रतिशत थी. आज 9.26 करोड़ से अधिक अतिरिक्त शौचालयों का निर्माण हो चुका है तथा शौचालययुक्त घरों का आंकड़ा 99.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इन सरकारी तथ्यों के साथ स्वतंत्र संस्था की निगरानी में हुए 2018-19 के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण को भी देखा जाना चाहिए.
इसमें शौचालय की सुविधावाले परिवारों की संख्या का अनुपात 90.7 प्रतिशत बताया गया है. इनमें से 96.5 प्रतिशत परिवार इसका उपयोग भी करते हैं. सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि 95.4 प्रतिशत गांवों में जलजमाव और कचरे की समस्या नाममात्र की है. ये आंकड़े हर तरह से प्रभावपूर्ण हैं तथा स्वच्छ भारत अभियान की सफलता को इंगित करते हैं.
पांच वर्षों में इतने व्यापक स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने और लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाने का यह कार्य भारत के भविष्य को स्वस्थ और सुंदर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है. इस वर्ष के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अभियान के दूसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन पर ध्यान देने का निर्णय लिया है.
पहले चरण में निर्मित 9.6 करोड़ शौचालयों तथा खुले में शौच से मुक्त 5.6 लाख गांवों में स्वच्छता के लाभों को समुचित ढंग से पहुंचाने के लिए कचरे के निपटारे को प्राथमिकता देना आवश्यक भी है. प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी पांच वर्षों में हर परिवार तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाने का प्रण भी लिया है. इसी के साथ जल संरक्षण के लिए भी योजनाएं बनायी जा रही हैं.
इस अभियान के तहत 95 प्रतिशत से अधिक शहरों को भी खुले में शौच से मुक्त किया गया है तथा एक करोड़ से अधिक लोगों ने स्वच्छ भारत अभियान का एप अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड किया है. इस वर्ष स्वतंत्र दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने का आह्वान किया है. संभवतः राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर इस दिशा में ठोस घोषणाएं भी हो सकती हैं.
स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नीतिगत निर्णयों, कार्यक्रमों और योजनाओं की सफलता का एक बहुत महत्वपूर्ण कारण यह है कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी इनके बारे में लोगों से सीधे संवाद करते रहते हैं. इससे अधिकारियों और नागरिकों में भी उत्साह का संचार होता है तथा सफलताएं मिलती हैं. इस दृष्टि से संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान के बाद स्वच्छ भारत के लिए गेट्स फाउंडेशन का सम्मान उपलब्धियों का रेखांकन है.
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