जल संचय की मुहिम चले
बदलते हुए मौसमी-चक्र में अब सतर्कता और सार्थकता के साथ जल संचय के विभिन्न आयामों और उपायों पर बल देने की जरूरत है. ऐसा देखा जा रहा है कि कहीं अतिवृष्टि हो रही है, तो कहीं अनावृष्टि. कुछ जगहों में सामान्य से भी कम बारिश हो रही है और घोर जल-संकट से लोग जूझ रहे […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
August 14, 2019 2:34 AM
बदलते हुए मौसमी-चक्र में अब सतर्कता और सार्थकता के साथ जल संचय के विभिन्न आयामों और उपायों पर बल देने की जरूरत है. ऐसा देखा जा रहा है कि कहीं अतिवृष्टि हो रही है, तो कहीं अनावृष्टि. कुछ जगहों में सामान्य से भी कम बारिश हो रही है और घोर जल-संकट से लोग जूझ रहे हैं.
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यह बात दीगर है कि शहरीकरण की वृद्धि से जल का दुरुपयोग बढ़ा है. एक और महत्वपूर्ण बात है कि परंपरागत जल-स्रोतों में कमी आना या खत्म हो जाना. बोरिंग कर मोटर से पानी के खिंचाव से भू-जल स्तर पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा है.
अगले कुछ वर्षों में जल-संकट से सभी क्षेत्र के लोग जूझेंगे और इससे बचने के लिए जल संचय की मुहिम के साथ जुड़ना ही होगा. इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की जरूरत है. रेन-वाटर हार्वेस्टिंग को कानूनी तौर पर लागू करने की भी आवश्यकता है ताकि लोग इसकी गंभीरता समझें.
डॉ मनोज ‘आजिज’, जमशेदपुर
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