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सेल्फी विद बाढ़!

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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ पत्रकार
puranika@gmail.com
एयरपोर्ट पर कई हेलीकॉप्टर खड़े थे. उनकी आपस की बातचीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं-
हेलीकॉप्टर एक- मैं अभी कई नेताओं को बाढ़ दिखा के लाया हूं. पता नहीं ऊपर से क्या दिखता है. मुझे लगता है कि कई नेता तो बाढ़ में डूबे पुलों को देख कर खुश ही होते हैं कि गुड, वो वाला पुल डूब गया, जो अपन ने बनवाया था.
विपक्षी कह रहे थे कि हमने नोट खा लिये और पुल कमजोर बना दिया. फिर नया बनेगा, फिर खायेंगे. ये नेता बाढ़ में भी कमाई निकाल लेते हैं.
गठबंधन की पॉलिटिक्स चलेगी और नये-नये मंत्री पद की डिमांड आयेगी. एक नया मंत्री पद हो सकता- बाढ़ग्रस्त निर्माण मंत्री. एक पद होता है- निर्माण मंत्री. एक और हो सकता है- बाढ़ग्रस्त नवनिर्माण मंत्री. बाढ़ग्रस्त पुल मंत्री, बाढ़ग्रस्त सड़क मंत्री, बाढ़ग्रस्त स्कूल मंत्री, बाढ़ग्रस्त कॉलेज मंत्री, ये मंत्री भी हो सकते हैं.
मैं सोचता हूं कि ये सब हर साल बाढ़ को पर्व की तरह मनाते हैं. हर साल हेलीकॉप्टर जश्न दौरा होता है. हर साल बाढ़ देखकर होना क्या है. बस हेलीकॉप्टर पर बैठ कर पुराना या नया नेता उड़ लेता है. जमीन पर मजबूत व्यवस्था करो कि दोबारा बाढ़ न आये. उड़-उड़ कर क्या देखना हर साल कि इस साल इस तरफ से कम सुंदर बाढ़ है या उस बार उस साइड से ज्यादा फोटोजेनिक थी. कुछ होना ही नहीं, तो देखने क्यों आते हो.
हेलीकॉप्टर दो- बेट्टे! जो कहीं से भी कमाई निकाल ले, वही नेता होता है. मुझे लगता है कि अगले बजट में बाढ़ प्रभावित इलाकों पर जल अतिरेक टैक्स लगेगा. वित्त मंत्री कह सकते हैं कि देश का बड़ा हिस्सा गर्मी में तप रहा है, तब बाढ़ वाले इलाकों में पानी बहुत ज्यादा है. इसका टैक्स उन्हें देना होगा. यू नो, मुझ में बैठ कर तमाम राज्यों के वित्तमंत्री ने सफर किया है.
मुझे उनके सोचने का स्टाइल पता है. कोई होशियार वित्त मंत्री तो सेल्फी विद बाढ़ का जुगाड़ कर सकता है और बाढ़ सेल्फी टैक्स भी लगा सकता है. अपने मुल्क की नयी पीढ़ी को हर आइटम के साथ सेल्फी चाहिए. हाल तो यह हो लिया है किसी डूबते को बचाने के बजाय नयी चाल के नौजवान उससे कहेंगे- रुक अभी मत डूबना, पहले सेल्फी लेने दे, फिर आराम से डूब जाना.
हेलीकॉप्टर तीन- हेलीकॉप्टर होना इन दिनों बहुत मुश्किल काम है. बताओ ऑटो रिक्शा जैसी हालत कर दी है. बंगलूर से मुंबई उड़ो विधायकों को लेकर, फिर मुंबई से न जाने कहां-कहां उड़ो. ऑटो रिक्शा सा जीवन हो गया है और फिर वही बातें बार बार- सरकार, उखाड़, पछाड़, मार, तकरार, चीत्कार, फुंकार, हाहाकार, अब की बार मैं मंत्री.
मैं ही मंत्री. उस पोस्ट वाला मंत्री. वो हमारी साइड है. वो हमारी साइड नहीं है. वो लगता है कि हमारी साइड है पर वह हमारी साइड नहीं है. हां वह जो उनके खेमे में अंदर तक घुसा हुआ है. जो बिल्कुल उनकी साइड लगता है, वह हमारी साइड है. समझ ही नहीं आता कि कौन किसकी साइड है. सचमुच हेलीकॉप्टर होना बहुत ही मुश्किल काम है.
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