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Home Opinion प्रभात खबर पटना यात्रा के 23 वर्ष पूरे : अपनी पाठकों का भरोसा ही हमारी ताकत

प्रभात खबर पटना यात्रा के 23 वर्ष पूरे : अपनी पाठकों का भरोसा ही हमारी ताकत

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प्रभात खबर पटना यात्रा के 23 वर्ष पूरे : अपनी पाठकों का भरोसा ही हमारी ताकत
आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक, प्रभात खबर
प्रभात खबर ने पटना में अपनी यात्रा के 23 वर्ष पूरे कर लिये हैं. प्रभात खबर ने एक सुदूर पिछड़े इलाके रांची से अपने सफर की शुरुआत की थी. लेकिन कुछ ही समय में प्रभात खबर ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना ली. आज प्रभात खबर 10 स्थानों- पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, रांची, जमशेदपुर, धनबाद, देवघर, कोलकाता और सिलीगुड़ी से एक साथ प्रकाशित होता है.
2019 के इंडियन रीडरशिप सर्वे के मुताबिक प्रभात खबर के पाठकों की संख्या एक करोड़ 41 लाख है. केवल तीन राज्यों से प्रकाशित होने के बावजूद देश के शीर्ष हिंदी अखबारों में प्रभात खबर छठे स्थान पर है. इस अखबार के आगे बढ़ने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ पाठकों को जाता है, जिन्होंने कई विकल्प होने के बावजूद प्रभात खबर के प्रति अपना स्नेह बनाये रखा.
सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ही प्रभात खबर की पत्रकारिता की पहचान रही है. हाशिये पर छूट गये लोगों की आकांक्षाओं को प्रभात खबर ने हमेशा स्वर दिया है और अपने सामाजिक दायित्व को बखूबी निभाया है. प्रभात खबर ने पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए अभियान चलाया. पॉलीथिन के इस्तेमाल के खिलाफ मुहिम चलायी. बिहार सरकार के बेटियों को पढ़ाने, पोशाक व साइकिल देने, दहेज के खिलाफ और शराबबंदी जैसे अभियानों में हाथ बंटाया है.
हम चाहते हैं कि बिहार हिंसा मुक्त समाज बने. अक्सर विभिन्न स्थानों से बहू-बेटियों के खिलाफ हिंसा की खबरें आती हैं. उनके उत्पीड़न, यहां तक कि जला देने और मार देने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं. यह किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है. यह कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है. यह सामाजिक सरोकार का विषय है. यह हम सब की जिम्मेदारी है कि कैसे बेटों और मर्दों को महिलाओं के प्रति आदर का संस्कार दें.
प्रभात खबर की परंपरा रही है कि वह समाज के हर वर्ग की आवाज बने, जोर-शोर से उनके मुद्दे उठाये. हमें अपने पाठकों का नैतिक समर्थन हर बार मिला है. हम जानते हैं कि एक अखबार के लिए पाठकों का प्रेम ही उसकी बड़ी पूंजी होती है. हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि प्रभात खबर ने सबसे अधिक घपले- घोटाले उजागर किये हैं. चारा घोटाला उनमें से एक है.
यह सच है कि मौजूदा दौर में खबरों की साख का संकट है. लेकिन आज भी अखबार खबरों के सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं. आपने गौर किया होगा कि रोजाना सोशल मीडिया पर कितनी झूठी खबरें चलतीं हैं. ऐसा नहीं है कि अखबारों में कमियां नहीं हैं. बाजार के दबाव में अखबार भी शहर केंद्रित हो गये हैं. यह भी सच है कि समय के साथ पाठकवर्ग भी बदल गया है. अखबार पहले खबरों के लिए पढ़े जाते थे, लेकिन मार्केटिंग के इस दौर में अखबार फ्री कूपन और मुफ्त लोटा-बाल्टी के आधार पर निर्धारित किये जाने लगे हैं.
यात्रा के इस अहम पड़ाव में अखबार में मैं पाठकों, विज्ञापनदाताओं, एजेंट और अभिकर्ता बंधुओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं. प्रभात खबर को आप सब की शुभकामनाओं की जरूरत है, ताकि हम अपने दायित्व को बखूबी निभाते रहें.
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