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समावेशी विकास की ओर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले प्रचंड जनादेश ने जहां एक ओर सरकार की नीतियों पर मुहर लगायी है, वहीं उम्मीदों को पूरा करने की राह भी हमवार कर दी है. हर जनादेश विविध आकांक्षाओं का प्रतिरूप होता है, लेकिन, इस बार उसमें वह भरोसा भी शामिल है, जो पांच सालों के कामकाज से पैदा हुआ है. जीत के बाद अपने गठबंधन की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तमाम भेदभावों को परे रखकर गरीबी से निजात पाने को अपनी प्राथमिकता बनाने की घोषणा की है.

इसके लिए उन्होंने सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है. साल 2014 में सरकार बनाने से लेकर इस चुनाव के पहले तक गरीब और निम्न आय वर्ग को देश की आर्थिक वृद्धि में सहभागी बनाने के लिए अनेक योजनाएं बनायी गयीं और कार्यक्रम चलाये गये. अर्थव्यवस्था को ठोस आधार देने के लिए कानून बने और नीतियों का निर्धारण हुआ. इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा एक अहम मुद्दा रहा और सरकार के रवैये ने देश को नया आत्मविश्वास दिया है.

इस मोर्चे पर ध्यान देते हुए आर्थिक मोर्चे पर और अधिक गंभीरता से काम करने की जरूरत है. समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों की तादाद हमारी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा है. इनके विकास और कल्याण की योजनाओं पर आवंटन न सिर्फ बरकरार रखा जाना चाहिए, बल्कि उसमें बढ़ोतरी भी होनी चाहिए. नीतियों और कार्यक्रमों ने जनता में सरकार के प्रति विश्वास को बढ़ाया है, उसे और मजबूत बनाने की दिशा में पहलकदमी होनी चाहिए. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उज्ज्वला योजना के तहत दिया गया एक भी गैस सिलेंडर किसी मजबूरी में खाली न रह जाये और किसी परिवार को फिर चूल्हे का रुख न करना पड़े.

कोई भी शौचालय पानी या नाली के इंतजाम के बिना न हो. लाभुकों के खाते में कल्याण राशि, अनुदान, भत्ता आदि समय से पहुंचे. हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है और आगामी सालों में इसके बढ़ते रहने का अनुमान है. मोदी सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को अधिक औपचारिक और पारदर्शी बनाने के लिए अनेक पहल की है. इस संबंध में सुधारों के जारी रहने की अपेक्षा स्वाभाविक है. रोजगार बढ़ाने, आमदनी के अवसर पैदा करने तथा किसानों को परेशानी से निकालने की चुनौती सरकार के सामने है.

इन मसलों से निपटने के लिए मुद्रा योजना, कौशल विकास, समर्थन मूल्य में वृद्धि, किसान सम्मान राशि, बीमा आदि जैसे उपायों को विस्तार देने पर विचार किया जाना चाहिए. अगले एक दशक में देश की अर्थव्यवस्था को 10 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, पर गरीबी के चंगुल से निकलने की कोशिश में अगर इसे पाने में कुछ देर हो जाये, तो चिंता की बात नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी के पास विचार-दृष्टि और नेतृत्व-क्षमता है. जनादेश के रूप में मिली आशा और विश्वास की इस पूंजी ने उन्हें राष्ट्र-निर्माण के उनके अभियान को पूरा करने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान किया है.

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