प बंगाल में चुनावी हिंसा

पूरी दुनिया में निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव कराना हमारी पहचान रही है, लेकिन इस बार चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में लोगों को मतदान करने से रोकने की कोशिश की गयी तथा डराया-धमकाया गया. हालात तो ऐसे थे कि लोग सकुशल मतदान करके लौटने पर भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे. आश्चर्य की बात […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 22, 2019 3:19 AM
पूरी दुनिया में निष्पक्ष व स्वतंत्र चुनाव कराना हमारी पहचान रही है, लेकिन इस बार चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में लोगों को मतदान करने से रोकने की कोशिश की गयी तथा डराया-धमकाया गया.
हालात तो ऐसे थे कि लोग सकुशल मतदान करके लौटने पर भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे. आश्चर्य की बात है कि सभी सातों चरणों में इस राज्य में हिंसा हुई. जो नेता एक-एक वोट के लिए गिड़गिड़ाते हैं, आम लोगों को सर पर बैठाते हैं, वही नेता कुर्सी पर बैठने के बाद तानाशाही पर कैसे उतर जाते हैं?
संविधान में नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार मिला हुआ है, लेकिन सूबे की मुख्यमंत्री को लोगों का ‘जय श्री राम’ बोलना बुरा लगता है और वह उन्हें राज्य से निकालने की धमकी दे डालती हैं. नेताओं का यह बरताव असहनीय है. स्थिति भयावह है और हिंदुस्तान की गरिमा बनाये रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की दखलअंदाजी जरूरी है.
उत्सव रंजन, नीमा, हजारीबाग