मोदी के केदारनाथ दर्शन पर दोहरा रवैया क्यों

जिन लोगों को हिंदू नेताओं का जालीदार टोपी और हरे कुर्ते, दुपट्टे लगाकर इफ्तार में जाना ढोंग या नाटक न लगा, उन्हें मोदी का गेरुआ पहन कर साधना करना बुरा लग रहा है. अपनी इसी मूर्खता और विभाजन के कारण हिंदू समाज की न कोई इज्जत करता है, न उसके मत का या किसी मांग […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 20, 2019 2:52 AM
जिन लोगों को हिंदू नेताओं का जालीदार टोपी और हरे कुर्ते, दुपट्टे लगाकर इफ्तार में जाना ढोंग या नाटक न लगा, उन्हें मोदी का गेरुआ पहन कर साधना करना बुरा लग रहा है. अपनी इसी मूर्खता और विभाजन के कारण हिंदू समाज की न कोई इज्जत करता है, न उसके मत का या किसी मांग का आदर करता है.
यह भी पहली बार देखा कि इस बार किसी राष्ट्रीय दल के नेता ने जालीदार टोपी पहनकर इफ्तार पार्टी की तस्वीरें जारी नहीं करवायी. वाकई अफसोस होता है ऐसे दोहरे रवैये पर. नियमित वेस्टर्न कपड़े पहनने वाले इन दिनों तरह-तरह के वस्त्र, जनेऊ और धोती साड़ी पहनने का ड्रामा कर रहे हैं, उन पर कुछ नहीं कहते.
जबकि मोदी का हिंदुत्व रुझान और उनकी आस्था कोई नयी बात नहीं है. वे तो प्रधानमंत्री बनने के बाद पशुपतिनाथ भी गये थे और पिछले साल भी केदारनाथ बद्रीनाथ गये थे.
शिखर चंद जैन, स्ट्रैंड रोड, कोलकाता