जग-मग होता देश

देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने का सरकार का संकल्प लगभग पूरा हो चुका है. वर्ष 2014 में ऐसे ढाई करोड़ घरों को विद्युतीकरण के लिए चिह्नित किया गया था. अब छत्तीसगढ़ में 20,134 और राजस्थान में 8,460 घर ही बचे हैं, जहां मार्च तक बिजली पहुंच जाने की उम्मीद है. सौ फीसदी घरों […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | February 13, 2019 6:17 AM
देश के हर घर तक बिजली पहुंचाने का सरकार का संकल्प लगभग पूरा हो चुका है. वर्ष 2014 में ऐसे ढाई करोड़ घरों को विद्युतीकरण के लिए चिह्नित किया गया था. अब छत्तीसगढ़ में 20,134 और राजस्थान में 8,460 घर ही बचे हैं, जहां मार्च तक बिजली पहुंच जाने की उम्मीद है. सौ फीसदी घरों को कनेक्शन देना सरकार की प्राथमिकता रही है.
इसके लिए सितंबर, 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौभाग्य योजना की शुरुआत की थी. इसे प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना भी कहा जाता है. दिसंबर, 2018 तक ही इस लक्ष्य को पूरा किया जाना था, पर तीन महीने की देरी बहुत अधिक नहीं है और इस कामयाबी के लिए सरकार की कोशिशें सराहनीय हैं. पिछले साल अपनी सालाना रिपोर्ट में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी भी विद्युतीकरण योजना की प्रशंसा कर चुकी है.
उस रिपोर्ट में उज्जवला योजना के साथ इस पहल को ग्रामीण भारत और गरीब आबादी के सशक्तीकरण में अहम योगदान के रूप में रेखांकित किया गया है, परंतु इस संदर्भ में दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं.
कनेक्शन देने के साथ बेहतर आपूर्ति तथा प्रबंधन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए. गांवों और कस्बों में बिना सही मीटरों के बिजली उपभोग करने और शुल्क देने की परिपाटी बदस्तूर जारी है. इसके अलावा कुछ घंटे बिजली मिलने की शिकायतें भी आम हैं. दूसरी बात यह है कि विद्युत ऊर्जा उत्पादन को ठीक किया जाये. मौजूदा आकलनों के मुताबिक, ताप बिजली उत्पादन क्षेत्र में ढाई लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है.
विद्युत क्षेत्र को मुश्किल से उबारने के लिए बनी उदय योजना के लक्ष्य से इस क्षेत्र में ज्यादा तकनीकी और वित्तीय नुकसान है. ऐसे में निजी क्षेत्र में नये संयंत्र की संभावना काफी कम है. ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण, शहरीकरण की प्रक्रिया तेज होने तथा औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए मांग में बढ़ोतरी स्वाभाविक है, लेकिन उसे पूरा करने में उत्पादकों को बहुत दिक्कत हो सकती है.
ऐसे में बिजली दरों में बढ़त की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. संतोष की बात है कि भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की क्षमता बढ़ाने में लगातार ध्यान दे रहा है. यदि बड़ी पनबिजली परियोजनाओं को छोड़ दें, तो 2014 में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव-एथेनॉल आदि) से छह करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता था.
अब यह क्षमता लगभग डेढ़ गुना बढ़ चुकी है. बीते कुछ सालों में सौर ऊर्जा उत्पादन में आठ गुना और पवन ऊर्जा में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुई है. ऐसे ऊर्जा स्रोतों की जरूरत न सिर्फ बिजली की मांग पूरी करने के लिए है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण पर रोक के लिहाज से भी है.
हाॅर्वर्ड विवि के हालिया शोध के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा पर जोर देकर भारत में हर साल एक करोड़ से अधिक जानें बचायी जा सकती हैं. वर्तमान संकेतों की मानें, तो सरकार की संतुलित ऊर्जा पहल आगामी वर्षों में आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम होगी.