किसानों को पैदावार के सीधे भुगतान से परहेज क्यों
केंद्र सरकार की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिखाता है. ‘किसानों की आमदनी 2022 में दुगुनी कर देंगे’ या ‘हमने किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना कर दिया, जो कांग्रेस ने सत्तर सालों में नहीं किया, अब वे चैन की नींद सोयेंगे’ आदि बातें केवल दिखावा ही साबित हुई हैं. जब हरियाणा […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
January 30, 2019 5:57 AM
केंद्र सरकार की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिखाता है. ‘किसानों की आमदनी 2022 में दुगुनी कर देंगे’ या ‘हमने किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना कर दिया, जो कांग्रेस ने सत्तर सालों में नहीं किया, अब वे चैन की नींद सोयेंगे’ आदि बातें केवल दिखावा ही साबित हुई हैं.
जब हरियाणा में भाजपा की सरकार के सामने किसानों को उनकी फसलों के मूल्य उनके खाते में सीधा ट्रांसफर करने की बात आयी, तो सरकार पीछे हट गयी. सरकार का यह कदम स्पष्ट रूप से किसान विरोधी नीति और नीयत को दर्शाता है. उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वे बोल कर पीछे हट जायेंगे.
निर्मल कुमार शर्मा ,गाजियाबाद
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