अधिकार से वंचित हो रहे पिछड़े समाज के बच्चे
देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं, पर अब भी देश के विभिन्न हिस्सों में दलित, आदिवासी वकिन्नर समाज को उनके अधिकार से वंचित रखा गया है. उनके बच्चे जाति, धर्म, लिंग अथवा नस्ल के आधार पर भेदभाव का शिकार होते हैं. कभी-कभी ऐसी भी खबरें आती हैं कि शिक्षकों द्वारा उन्हें अंतिम […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
January 25, 2019 7:51 AM
देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं, पर अब भी देश के विभिन्न हिस्सों में दलित, आदिवासी वकिन्नर समाज को उनके अधिकार से वंचित रखा गया है. उनके बच्चे जाति, धर्म, लिंग अथवा नस्ल के आधार पर भेदभाव का शिकार होते हैं.
कभी-कभी ऐसी भी खबरें आती हैं कि शिक्षकों द्वारा उन्हें अंतिम पंक्ति में बैठाया गया. पिछड़े समाज के बच्चे भी अपने अधिकार से वंचित हैं, उन्हें भी स्कूल में तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
जबकि हमारा संविधान भेदभाव हीनता के खिलाफ है. देश को आजाद हुए इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी दलित, आदिवासी, मीणा समाज के बच्चों को नेतृत्व क्षमता से वंचित रखा गया है. जबकि हमारा संविधान समानता व समान शिक्षा की बात करता है.
नितेश कुमार सिन्हा, जानपुल चौक (मोतिहारी)
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