अभिव्यक्ति की आजादी का खतरनाक परिणाम

जेएनयू में फरवरी 2016 में हुए कार्यक्रम में देश विरोधी नारेबाजी के लिए चार्जशीट दाखिल होते ही उस पर राजनीति शुरू हो गयी है. कन्हैया कुमार और उमर खालिद को चार्जशीट मे देशद्रोही का आरोपित बनाया गया है. इनके अलावा इसमें अनिर्बान व सात कश्मीरी छात्र सहित कुल 36 नाम हैं. देश में बीते तीन-चार […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | January 16, 2019 7:26 AM
जेएनयू में फरवरी 2016 में हुए कार्यक्रम में देश विरोधी नारेबाजी के लिए चार्जशीट दाखिल होते ही उस पर राजनीति शुरू हो गयी है. कन्हैया कुमार और उमर खालिद को चार्जशीट मे देशद्रोही का आरोपित बनाया गया है. इनके अलावा इसमें अनिर्बान व सात कश्मीरी छात्र सहित कुल 36 नाम हैं.
देश में बीते तीन-चार साल में एक चलन से शुरू हो गया है जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश की संप्रभुता पर ही सवाल उठाये जाने लगे हैं. यह एक अत्यंत खतरनाक परंपरा है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हमारा संविधान हम सभी को अपनी बात कहने का अधिकार देता है लेकिन कुछ भी कहने का अधिकार हमें किसी भी सूरत में कहीं से प्राप्त नहीं हो सकता है.
अमन सिंह, बरेली,उत्तर प्रदेश