सीबीएसइ का फैसला प्रशंसनीय

सीबीएसइ ने बच्चों के स्कूली बस्ते का वजन निर्धारित कर दिया हैं. उसने स्कूलों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया हैं. इसकी जितनी भी सराहना की जाये, कम हैं. बचपन छोटा होता हैं और दुबारा नहीं आता. इस बचपन का आनंद कॉपी-किताबों के बोझ से दबा हुआ हैं. बचपन का आनंद लेने की बजाय बच्चे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 28, 2018 12:32 AM
सीबीएसइ ने बच्चों के स्कूली बस्ते का वजन निर्धारित कर दिया हैं. उसने स्कूलों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिया हैं. इसकी जितनी भी सराहना की जाये, कम हैं.
बचपन छोटा होता हैं और दुबारा नहीं आता. इस बचपन का आनंद कॉपी-किताबों के बोझ से दबा हुआ हैं. बचपन का आनंद लेने की बजाय बच्चे बोझ उठा रहे हैं. यह उनकी सेहत के लिए भी बेहद हानिकारक हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भावी जीवन में भुगतना पड़ता हैं. अभिभावक सब कुछ समझते हुए भी विवश होते हैं.
बाल्यकाल में बच्चे ज्यादा सीखते हैं. अगर सीखना आनंद से जुड़ जाये, तो इसकी गति और तेज हो जाती हैं. हम सिर्फ विकसित देशों की शिक्षा व्यवस्था की बातें करते हैं. हमें यह भी देखना चाहिए कि वे उच्च शिक्षा के साथ-साथ नर्सरी शिक्षा के प्रति भी बेहद संवेदनशील हैं. कई देशों में तो छोटे बच्चे बस्ता लेकर स्कूल ही नहीं जाते. जरूरी हैं कि बच्चे भारी बोझ ढोने की जगह सीखें.
सीमा साही , बोकारो