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पिछत्तीस का आंकड़ा

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सुरेश कांत
वरिष्ठ व्यंग्यकार
drsureshkant@gmail.com
अभी तक छत्तीस का आंकड़ा ही सुना था. और सुना क्या था, देखा भी था. हालांकि आज की पीढ़ी ने उसे सुना ही होगा, देखा नहीं. और सुना भी होगा, पक्का नहीं है.
क्योंकि जिन्हें केवल अंग्रेजी की गिनती आती हो, जो नित अंग्रेजी को ही ओढ़ते-बिछाते हों, हिंदुस्तानी होकर भी जो अंग्रेजी जानने पर गर्व करते हों, हिंदी को लेकर खुद लज्जित हो जाते हों और दूसरों को भी लज्जित करने से न चूकते हों, उन्होंने छत्तीस के आंकड़े को सुना भी होगा, इसमें संदेह है. देखना दूर की बात है.
जबकि यह आंकड़ा देखने से ही ताल्लुक रखता है. छत्तीस के आंकड़े को बिना देखे समझा नहीं जा सकता, इस्तेमाल भले किया जा सकता हो. निदा फाजली तो इस्तेमाल करने से भी आगे बढ़कर, ऐसी बातें औरों को समझाने भी लगते थे, जिन्हें वे खुद नहीं समझते थे.
यकीन न हो, तो उनका यह कन्फेशनात्मक शे’र देखिए-कभी कभी यूं भी हमने अपने जी को बहलाया है, जिन बातों को खुद नहीं समझे औरों को समझाया है. छत्तीस के आंकड़े की खासियत समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि छत्तीस कहते किसे हैं.
उनासी और नवासी में फर्क न कर सकनेवालों की जानकारी के लिए बता दूं कि छत्तीस राष्ट्रभाषा अंग्रेजी में थर्टी सिक्स को कहते हैं. देवनागरी में तीन और छह के आंकड़ों का रूपाकार एक-जैसा है, बस दोनों की दिशा विपरीत है. एक का रुख बायीं ओर रहता है, तो दूसरे का मुख दायीं ओर. इसी कारण छत्तीस के आंकड़े में विरोधी अर्थ आया.
उनका यह विरोध सत्ताधारी और विपक्षी दलों के नेताओं जैसा नहीं, जो दिनभर एक-दूसरे को गालियां देने के बाद रात को मिलकर दारू और चिकन उड़ाते हुए जनता पर हंसते हैं, जो उन्हें लेकर आपस में लड़ बैठती है. न ही एक-दूसरे को खराब बताने वाले विरोधी दलों जैसा होता है, जो चुनाव जीतने के बाद मिलकर सरकार बना लेते हैं. उनका विरोध सचमुच का विरोध है, जो किसी भी हालत में पलटकर तरेसठ के आंकड़े में नहीं बदलते.
हां, तरेसठ का आंकड़ा तीन और छह के आंकड़ों द्वारा अपनी जगह और दिशा दोनों बदल लेने से आता है और विरोध के बजाय प्रेम का अर्थ देने लगता है. हालांकि, अंग्रेजी का सिक्सटी नाइन अंक जहां तक चला जाता है, पाठक इसका अनुभव अपने जीवनसाथी के साथ कर सकते हैं.
लेकिन अब प्रमुख विरोधी दल के नेता द्वारा मध्य प्रदेश की एक जनसभा में ‘पिछत्तीस’ लाख युवाओं के बेरोजगार होने की बात कहने से छत्तीस के आंकड़े के स्थान पर ‘पिछत्तीस’ का आंकड़ा प्रसिद्ध हो रहा है.
विशेषज्ञों द्वारा यह बताने के बावजूद कि देश में कुछ स्थानों पर पैंतीस को ‘पिछत्तीस’ भी कहा जाता है, सत्ताधारी दल के नेता इसके लिए उन्हें पप्पू बताने पर तुल गये हैं. उनके पैंतीस को ‘गलत’ बोलने से मध्य प्रदेश में पैंतीस लाख युवाओं के बेरोजगार होने का मामला स्वत: गलत मान लिया जायेगा, ऐसी आशा करना भी गलत नहीं है.
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