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मेरी आवाज ही पहचान है

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शफक महजबीन

टिप्पणीकार

mahjabeenshafaq@gmail.com

विलियम शेक्सपियर ने कहा है- ‘अगर संगीत प्रेम का आहार है, तो इसे जरूर बजाएं.’ दुनिया के महान नाटककार शेक्सपियर के ये शब्द हमें बताते हैं कि संगीत प्रेम के कितने करीब है. संगीत हमारी रूह की वह जबान है, जो दिलों को दिलों से जोड़ती है. यही वजह है कि सदियों से हर खास-ओ-आम को संगीत से लगाव रहा है और बड़ी तादाद में लोग गायिकाओं की आवाज के दीवाने रहे हैं.

ऐसी ही जादू भरी आवाज है ‘स्वर कोकिला लता मंगेशकर’ की, जिनके करोड़ों दीवाने हैं.हजारों खूबसूरत गीतों को मधुर सुर देनेवाली शहद जैसी आवाज की मल्लिका लता मंगेशकर का जन्म आज ही के दिन 28 सितंबर, 1929 को एक मराठी परिवार में हुआ था. इनके पिता दीनानाथ मंगेशकर को नाटक और संगीत में एक अच्छा मकाम हासिल था. यह कम लोगों को मालूम है कि लताजी का पहला नाम ‘हेमा हरिदकर’ था. फिल्म इंडस्ट्री में लोग उन्हें ‘लता दीदी’ भी कहते हैं. अनेक सम्मानों से नवाजी जा चुकीं ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर की शख्सियत सुरों के समंदर में अनमोल मोती की तरह है.

लताजी का शुरुआती जीवन बहुत संघर्षोंभरा था. छोटी-सी उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी इनके नन्हें कंधे पर आ गयी. परिवार की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए इन्हें अभिनय भी करना पड़ा, हालांकि इन्हें अभिनय पसंद नहीं था.

इस जिम्मेदारी के बीच संगीत की अच्छी शिक्षा लेने के बाद भी फिल्म इंडस्ट्री में इन्हें खूब संघर्ष करना पड़ा. समय बीता, जब संगीतकार गुलाम हैदर ने लताजी को पहचाना और उनका गाना रिकॉर्ड कराया, तब उन्हें ब्रेक मिलने शुरू हुए. गुलाम हैदर ने लताजी को फिल्म ‘मजबूर’ में ‘दिल मेरा तोड़ा, कहीं का न छोड़ा…’ गाने का मौका दिया था. लताजी से पहले गुलाम हैदर ने ही ‘मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां’ को खोजा था.

अस्सी की उम्र में उन्होंने आखिरी गाना गाया- इस उम्र में भी उनकी दिलकश आवाज ऐसे लगी, जैसे कोई छोटी उम्र की सिंगर गा रही हो. वे एक ऐसी गायिका रही हैं, जो शब्दों के गलत होने पर ऐतराज करती थीं और उन शब्दों को बदलवाकर ही गाती थीं. सुर साम्राज्ञी लताजी के गाये नग्में उन्हीं की तरह सदाबहार रहेंगे.

गुलाम हैदर, नौशाद, शंकर-जयकिशन, मदन मोहन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे महान संगीतकारों के संगीबद्ध गीतों को गानेवाली लताजी का सुर कभी नहीं डगमगाया. पाकिस्तान के मशहूर गायक बड़े गुलाम अली साहब तारीफ में कहते थे- ‘लता गलती से भी बेसुरी नहीं होती.’

लता मंगेशकर की शख्सियत बेहद खुशमिजाज और अहंकाररहित है. उन्हें देखकर यह यकीन नहीं होता कि तीस अलग-अलग भाषाओं में गानेवाली इस महान गायिका का जीवन बिल्कुल सादा है. मैं उनका नग्मा गुनगुना रही हूं- ‘नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जायेगा, मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे…’ आप भी भारत रत्न के जन्मदिन पर उनके नग्मे गुनगुनाकर उन्हें बधाइयां और शुभकामनाएं भेजें.

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