कोई चोरी नहीं की!

सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के एक छोटे-से तबके के लिए खुशियों की सौगात ले कर आया. जिस फैसले से 158 साल पुराना कानून बदल जाये, उसका ऐतिहासिक होना लाजमी है. फैसले ने सारे देश को इन्हीं खबरों के इर्द-गिर्द समेट कर रख दिया. किसी ने फैसले को अपनी जीत मानी, तो किसी ने आजादी […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 10, 2018 12:23 AM
सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के एक छोटे-से तबके के लिए खुशियों की सौगात ले कर आया. जिस फैसले से 158 साल पुराना कानून बदल जाये, उसका ऐतिहासिक होना लाजमी है. फैसले ने सारे देश को इन्हीं खबरों के इर्द-गिर्द समेट कर रख दिया.
किसी ने फैसले को अपनी जीत मानी, तो किसी ने आजादी की रोशनी. प्यार से पाबंदी हटी जैसे नारे अखबारों की सुर्खियां बन गये. समाज और कानून से लड़ने वाले लोगों का मानना था कि प्यार किया, कोई चोरी नहीं की. फिर हम अपराधी कैसे? आम इंसान की शक्ल में पैदा हुआ व्यक्ति जाने कब और कैसे गुमनाम गलियों में समा गया? अपने वजूद की लड़ाई खुद लड़ने वालों को देश सलाम करता है.
पोंगापंथियों के लिए न हजम होने वाला फैसला यह हो सकता है, मगर इसे कबूलना ही वक्त की जरूरत है. निजता और बराबरी का सवाल नैसर्गिक अधिकारों से जोड़ कर देखा जाना बिल्कुल सही है, मगर रिश्ते की आड़ में संभावित खतरों से बचना होगा, तभी इस लड़ाई का मकसद पूरा होगा.
एमके मिश्रा, रातू, रांची