अधूरी विकास योजनाओं का जिम्मेदार कौन
महालेखाकार की रिपोर्ट कहती हैं कि 4000 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं अधूरी हैं. इन योजनाओं को तय समय में पूरा नहीं करने के कारण इन पर होने वाले खर्च का बढ़ना लाजिमी हैं. जब रांची का यह सूरतेहाल हैं, तो राज्य के और स्थानों की विकास योजनाओं का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
September 7, 2018 6:12 AM
महालेखाकार की रिपोर्ट कहती हैं कि 4000 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं अधूरी हैं. इन योजनाओं को तय समय में पूरा नहीं करने के कारण इन पर होने वाले खर्च का बढ़ना लाजिमी हैं. जब रांची का यह सूरतेहाल हैं, तो राज्य के और स्थानों की विकास योजनाओं का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता हैं.
जनता की गाढ़ी कमाई अगर ज्यादा खर्च भी हो जाये, तो संबंधित अधिकारियों को क्या फर्क पड़ता हैं? मुख्यमंत्री को स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए. किसी सरकारी विभाग या स्कूल में तय समय पर निर्धारित रकम नहीं जमा करने पर जनता को लेट फाइन या जुर्माना भरना पड़ता हैं.
जब थोड़े-से पैसों के लिए फाइन किया जाता है, तो यह रकम तो काफी ज्यादा हैं. लेट फाइन लगाना अधिकारियों की कार्यशैली को भी सुधारने में मददगार हो सकता है. इससे अंततः जनता की भलाई होगी .
सीमा साही, बोकारो
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