संविधान जलाना शर्मनाक
नौ अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी अभियान चलाने वाले एक वर्ग ने भारतीय संविधान की कुछ प्रतियां जला डालीं. उनकी यह करतूत सोशल मीडिया पर आग में घी डालने का कार्य कर रही है. सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि यह घटना दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में हुई और वह […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
August 14, 2018 6:45 AM
नौ अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी अभियान चलाने वाले एक वर्ग ने भारतीय संविधान की कुछ प्रतियां जला डालीं. उनकी यह करतूत सोशल मीडिया पर आग में घी डालने का कार्य कर रही है.
सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की है कि यह घटना दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में हुई और वह सब कुछ चुपचाप देखती रही. संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है और इसके प्रति सम्मान प्रकट करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है.
किसी विषय, विचारधारा, व्यवस्था या सरकार के कदम से मतभेद होना, उसका विरोध करना, नारे लगाना और विरोध स्वरूप प्रतीकात्मक व्यवहार करना जायज हो सकता है और यही लोकतंत्र की खूबसूरती है, किंतु संविधान को जलाना कहीं से उचित, तार्किक या लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुकूल कदम नहीं हो सकता.
नीलेश मेहरा, गोड्डा
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