आदिवासियों से सीखने की जरूरत

सिर्फ आदिवासी दिवस मना कर न तो आदिवासियों का कल्याण हो सकता है, न ही उनकी संस्कृति व परंपरा को बचाया जा सकता है. आज जिस तरह से औद्योगिकीकरण के होड़ में जल, जंगल, जमीन का दोहन किया जा रहा है, विकास के नाम पर आदिवासियों की परंपरा व संस्कृति को गहरा चोट पहुंचा है. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 9, 2018 11:56 PM
सिर्फ आदिवासी दिवस मना कर न तो आदिवासियों का कल्याण हो सकता है, न ही उनकी संस्कृति व परंपरा को बचाया जा सकता है. आज जिस तरह से औद्योगिकीकरण के होड़ में जल, जंगल, जमीन का दोहन किया जा रहा है, विकास के नाम पर आदिवासियों की परंपरा व संस्कृति को गहरा चोट पहुंचा है. यह एक सच्चाई है कि पर्यावरण पर दीर्घकालिक असर पड़ा है. इसका न केवल मानव पर बल्कि विश्व पर प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है.
पर्यावरण के साथ खेलना जितना आसान है पर्यावरण को संवारना उतनी ही कठिन चुनौती है. इस कड़ी में अगर आदिवासियों की ओर देखा जाये तो यह पता चलता है आदिवासियों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है. वे किस तरह से जल, जंगल व जमीन को अपनी परंपरा व संस्कृति के साथ जोड़कर प्रकृति का संरक्षण करते हैं, बल्कि उसे बिना नुकसान पहुंचाये प्राकृतिक संसाधन का उचित उपयोग भी कर रहे हैं.
दीपक कुमार दास, इमेल से