यौन शोषण व मानव तस्करी

मानव तस्करी हमारे समाज में कोढ़ की तरह फैला हुआ है. इसको खत्म करने के लिए पहली बार संसद में ‘ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स बिल, 2018’ पेश हुआ है. बच्चों के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाओं ने अब अनैतिकता की महामारी का रूप ले लिया है. कुछ दिन पहले ही बच्चों के यौन शोषण […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 25, 2018 6:42 AM
मानव तस्करी हमारे समाज में कोढ़ की तरह फैला हुआ है. इसको खत्म करने के लिए पहली बार संसद में ‘ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स बिल, 2018’ पेश हुआ है. बच्चों के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण की घटनाओं ने अब अनैतिकता की महामारी का रूप ले लिया है. कुछ दिन पहले ही बच्चों के यौन शोषण और दुष्कर्म के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान करने के लिए जो अध्यादेश लाया गया था, उसे भी कानून में बदलने का एक विधेयक ‘क्रिमिनल लॉ बिल, 2018’ लाया जा रहा है.
देश में प्रति आठ मिनट पर एक बच्ची गुम होती और हर घंटे दो बच्चे दुष्कर्म के शिकार होते हैं. इसी तरह हर घंटे करीब आठ बच्चे अपनी मां के आंचल से बिछुड़ जाते हैं. ये बच्चे मानव तस्करी के शिकार होते हैं. इन घटनाओं को रोकने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है. सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए.
डाॅ हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर