पर्यावरण का दंश
मॉनसून की शुरुआत हो चुकी है. कहीं खुशी, तो कहीं गम का यह मौसम कहीं जायज, तो कहीं नाजायज जैसा लगता है. उत्तर पूर्वी राज्यों में बाढ से हाहाकार मचा हुआ है, तो वहीं मध्य भारत में लोग पीने के पानी को लेकर संकट झेल रहे हैं. दरअसल, इन सबके लिए हम ही जिम्मेदार हैं. […]
By Prabhat Khabar Digital Desk |
July 17, 2018 7:03 AM
मॉनसून की शुरुआत हो चुकी है. कहीं खुशी, तो कहीं गम का यह मौसम कहीं जायज, तो कहीं नाजायज जैसा लगता है. उत्तर पूर्वी राज्यों में बाढ से हाहाकार मचा हुआ है, तो वहीं मध्य भारत में लोग पीने के पानी को लेकर संकट झेल रहे हैं.
दरअसल, इन सबके लिए हम ही जिम्मेदार हैं. मानव ने अपनी सुख-सुविधा की खातिर पर्यावरण को इस कदर नुकसान पहुंचाया है कि परिणाम हम सभी के सामने है. शहरीकरण ने तो मानो आग में घी डालने का काम किया है.
कुछ देर की बारिश से ही महानगर मुंबई डूबने लगता है, तो वहीं दिल्ली की रफ्तार थम-सी जाती है. छोटे-बड़े दूसरों शहरों का भी कमोबेश यही हाल है. कुल मिलाकर अब भी हमने सुधार की कोशिश नहीं की, तो भविष्य की चुनौतियों से निबटना असंभव हो जायेगा .
दीपक कुमार दास, चंदनकियारी.
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