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सीबीएसइ पेपर लीक में दोबारा परीक्षा : बच्चों का क्या कसूर

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सीबीएसइ पेपर लीक में दोबारा परीक्षा : बच्चों का क्या कसूर
II आशुतोष चतुर्वेदी II
सीबीएसइ ने पेपर लीक होने के कारण 12वीं के इकोनॉमिक्स और 10वीं के मैथ्स की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है. यह फैसला लाखों विद्यार्थियों को मानसिक आघात पहुंचाने वाला और यह एक तरह से बच्चों और उनके परिवारों को बेवजह की सजा के समान है.
इससे संसाधनों का अपव्यय होगा, वह अलग है. ऐसी खबरें हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बात कर नाराजगी जाहिर की है और इस मामले में सख्त कार्रवाई करने को कहा है.
यह तय है कि पेपर लीक करने के पीछे कोई गैंग योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था और हमारी व्यवस्था उनसे निबटने में नाकामयाब रही. अक्सर देखा जाता है कि हम राज्य बोर्ड परीक्षाओं की अनियमितताएं रोकने में असफल हो जाते हैं. यह खबर न केवल बच्चों, बल्कि उनके माता-पिता के लिए भी तनाव पैदा करने वाली है.
बच्चों को परीक्षा दिलवाने के लिए माता-पिता अपने दफ्तरों से छुट्टी लेते हैं. हम सब जानते हैं कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को लेकर बच्चे भारी तनाव में रहते हैं. कई बार यह तनाव दुखद हादसे को भी जन्म देता है. 10वीं के अधिकांश बच्चों की परीक्षाएं गणित के पेपर के साथ समाप्त हो गयीं थीं.
12वीं के इकोनॉमिक्स के पेपर के बाद अनेक बच्चे जेइइ की तैयारी में लग गये थे. इसके बाद भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं का कार्यक्रम तय है. अब वे एक बार फिर परीक्षाओं के जाल में फंस गये हैं. केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों को हर हाल में कड़ी सजा मिले.
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