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वेलेंटाइन में आलू

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आलोक पुराणिक
व्यंग्यकार
सवाल- इतने नौजवान बावले होकर घूम रहे हैं वेलेंटाइन-वेलेंटाइन करते. क्या वेलेंटाइन कोई रोजगार योजना है, जो इस बेरोजगार मुल्क में बहुत पाॅपुलर हो रही है?
जवाब- वेलेंटाइन एक योजना है, जिससे बेरोजगारों की जेब से तो रकम निकल जाती है, पर रकम उनके पास आ जाती है, जिनके पास घना रोजगार पहले से ही है. टेडी बीयर बेचनेवाले, गुलाब बेचनेवाले और चाॅकलेट बेचनेवाले बहुत कमा लेते हैं.
सवाल- चाॅकलेट का इश्क से क्या संबंध है?
जवाब- एक समय की बात है. चाॅकलेट के कारोबार में घनी मंदी चल रही थी. पब्लिक को समझ आ रहा था कि हेल्थ के लिए मीठी चाॅकलेट खाना सही नहीं होता. चाॅकलेट वालों ने वेलेंटाइन इंडस्ट्रीवालों से संपर्क किया कि हमारी मंदी आप ही दूर कर सकते हैं. वेलेंटाइन के बावले कुछ भी खरीदकर कुछ भी गिफ्ट कर सकते हैं. सो आप चाॅकलेट को वेलेंटाइन किट में शामिल करवा लो. ऐसे चाॅकलेट वेलेंटाइन किट में शामिल हो ली और उसकी मंदी दूर हो गयी.
सवाल- जिस आइटम में मंदी चल रही हो, उसे वेलेंटाइन किट में शामिल करने से मंदी दूर होगी क्या?
जवाब- बिल्कुल. उद्योगपति शाणे होते हैं, तो अपने आइटम शामिल करवा लेते हैं वेलेंटाइन किट में. किसान बेचारे भोले होते हैं. अब आलू जैसे बहुत सस्ता मिल रहा है. किसान कुछ ऐसी जुगाड़ कर दें कि वेलेंटाइन किट में आलू को शामिल करवा लें. कुछ ऐसी कहानी निकलवा लें कि प्रेमी ने प्रेमिका को आलू देकर कहा कि मेरा प्रेम आलू जैसा है.
जैसे आलू को देखकर पता नहीं लगाया जा सकता कि इसकी शुरुआत कहां और इसका अंत कहां, ऐसे ही मेरे प्रेम की न शुरुआत है, न अंत है. आलू ही प्रेम का सच्चा प्रतीक है, ऐसे इश्तिहारों के जरिये आलू के भाव बहुत स्पीड से बढ़ाये जा सकते हैं. एक पीस आलू पांच सौ रुपये का बिक सकता है. आलू उत्पादक संघ वेलेंटाइन डे के आसपास कैटरीना कैफ से माॅडलिंग करा दे कि मेरा आलू मेरा लव. कैटरीना आलू के साथ दिख जाएं, तो एक आलू हजार का बिकेगा. खाने को न मिलेगा आलू, बावले छोकरे सारा आलू प्रेम में खपा डालेंगे.
सवाल- एक कनफ्यूजन है. एक तरफ तो ऐसी खबरें आती हैं कि छोकरे बेरोजगार घूम रहे हैं, पैसे नहीं हैं उनके पास. दूसरी तरफ खबरें आ रही हैं कि ये ही छोकरे पांच सौ रुपये का एक गुलाब और हजार हजार के टेडी बीयर और सैकड़ों की चाॅकलेट खरीदकर गिफ्ट कर रहे हैं. क्या है यह?
जवाब- वेलेंटाइन डे पर छोकरा लोग अमीरी में बिल गेट्स का बाप दिखता है, पर वैसे वह गरीबी की रेखा के बीस किमी नीचे लटका हुआ है. ये छोकरे लड़कियों को गिफ्ट करते वक्त तो एकदम ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स के ताऊ हो जाते हैं, पर बाप से पैसे ऐसे मांगते हैं, मानो कालाहांडी के नागरिक हों और उनके पास दो रोटी के पैसे भी न हैं.
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