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चांदी के चम्मच

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सुरेश कांत
वरिष्ठ व्यंग्यकार
चम्मच में बहुत आकर्षण है, तभी वह सबको आकर्षित कर लेती है. चीजों को ही नहीं, आदमियों को भी. आकर्षित करने का मतलब है खींचना. ‘आकर्षण’ में ‘आ’ उपसर्ग के बाद जो ‘कर्षण’ शब्द है, वह ‘कृष’ धातु से बना है, जिसका अर्थ ‘खींचना’ होता है. अर्थ तो कृषक का भी वही होता है, क्योंकि वह धरती में से अन्न खींचकर सबका पेट भरता है, पर शायद इसी अपराध में आजकल उस बेचारे को मौत अपनी तरफ खींचे ले रही है.
चम्मच अगर चांदी का हो, तब तो कहना ही क्या! किस्सा मशहूर है कि चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चांदनी चौक में चांदी के चम्मच से चटनी चटायी. पहले-पहल यह किस्सा सुनकर मैं बहुत हैरान हुआ कि चंदू के चाचा को भला यह क्या सूझी? चंदू की चाची को चांदनी चौक ले जाकर चटायी भी, तो चटनी?
फिर सोचा, हो सकता है, चाचा की बहुत तमन्ना रही हो चाची को चटनी चटाने की, पर घर में उसका मौका न मिल पाता हो और इसलिए चाची को किसी बहाने से चांदनी चौक लेकर गये हों और वहां अपनी यह हसरत पूरी की हो. पहले परिवार बड़े होते थे, जिस कारण अक्सर किसी को भी चटनी तक चाटने-चटाने का मौका आसानी से नहीं मिल पाता था.
हमारे दोस्तों में एक चंदू नाम का लड़का हुआ करता था. हमने उससे भी पूछा कि भाई, तुम्हारे चाचा ने यह क्या किया? बेचारा सकते में आकर बोला, क्यों, क्या कर दिया मेरे चाचा ने? हमने कहा, लो बताओ, सारी दुनिया को पता है, सिवाय तेरे! अबे, वे तेरी चाची को सरे-आम चांदनी चौक पर चांदी के चम्मच से चटनी चटाते पकड़े गये और अब सब जगह इसी की चर्चा हो रही है! सुनकर बेचारा शर्म से इतना गड़ गया कि हमें ही खींचकर बाहर निकालना पड़ा किसी तरह.
अलबत्ता, सदमे से उबरने के बाद उसे ध्यान आया कि उसका तो कोई चाचा ही नहीं है. बड़े होकर चम्मच चमचे कहलाने लगते हैं. उनकी देखा-देखी कुछ लोग भी चमचों में कन्वर्ट हो जाते हैं. चमचा बननेवाले और चमचा बनानेवाले, दोनों की चमचातुरता देखते ही बनती है. ऐसे लोगों ने समाज में एक नया वर्ग पैदा किया है, जिसे ‘गे’ की तर्ज पर ‘चे’ कहा जा सकता है. ये लोग भी जल्दी ही अपने संबंधों को वैधता प्रदान करवाने के लिए अदालतों के चक्कर काटते मिलें, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. कुछ चमचे अपनी चमचिष्ठा साबित करने की हड़बड़ी में अपने पार्टनर की छीछालेदर भी करवा देते हैं, पर पार्टनर को उसमें भी मजा ही आता है.
कुछ बच्चे चांदी का चम्मच लेकर ही पैदा होते बताये जाते हैं, तो कुछ बड़े होकर उन्हें चुराने की कोशिश करते भी पाये जाते हैं, जैसा कि अभी सरकारी दौरे पर लंदन गये दो पत्रकारों ने एक होटल में आयोजित भोज-समारोह में किया. विदेश में अपने देश का नाम चमकाने का एक यही मुफीद तरीका उन्हें नजर आया होगा.
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