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ब्लॉग लिखकर मुश्किल में फंसे आशुतोष का पार्टी ने भी नहीं दिया साथ

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ब्लॉग लिखकर मुश्किल में फंसे आशुतोष का पार्टी ने भी नहीं दिया साथ

पत्रकार से राजनेता बने आशुतोष की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं पड़ रही है. ब्लॉग लिख कर अपनी पार्टी के नेता संदीप कुमार का बचाव करने की कोशिश नाकाम होती दिख रही है. उल्टे उनके इस ब्लॉग के बाद पत्रकारबिरादरीसे लेकर राजनीतिक गलियारों में उन्हें चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

अपने ब्लॉग में उन्होंने सेक्स स्कैंडल में फंसे संदीप कुमार की तुलना गांधी, नेहरू, वाजपेयी से कर दी. आशुतोष के इस तर्क को उनकी पार्टी के नेताओं ने खारिज कर दिया. गोपाल राय ने कहा यह आशुतोष का निजी मत हो सकता है. पार्टी उनकी राय से सहमत नहीं है.
अपनी चौतरफा आलोचना से घबराये आशुतोष ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार एसपी अगर आज जिंदा होते तो पत्रकारिता के मौजूदा हालत को देखकर दुखी होते. एसपी सिंह के साथ कम कर चुके कई पत्रकारों ने उनकी इस आलोचना का ट्वीट कर जवाब दिया और कहा कि एसपी सिंह अगर जिंदा होते तो अपने शिष्यों पर शर्मिंदा होते. ज्ञात हो कि आशुतोष अपने करियर के शुरुआती दिनों में दिवंगत पत्रकार एसपी सिंह के साथ काम कर चुके हैं.
आशुतोष को आम आदमी पार्टी मे अरविंद केजरीवाल के करीबी माना जाता है. जानकार बताते हैं कि पार्टी में योगेंद्र यादव के जाने के बाद आशुतोष मुख्य रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं. टीवी चैनलों में अकसर पार्टी का पक्ष रखने वाले आशुतोष डिबेट के दौरान उग्र हो जाते हैं.
पहले भी विवादों में फंस चुके हैं आशुतोष
यह पहली घटना नहीं है जब आशुतोष विवादों में फंस चुके हैं. दिल्ली में एक प्रदर्शन के दौरान गजेंद्र सिंह नाम के एक व्यक्ति ने पेड़ पर फांसी लगा ली थी. पहले तो आशुतोष ने इस घटना के दौरान आम आदमी पार्टी के रवैये को सही ठहराया था. घटना के बाद आशुतोष ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था, "यह अरविंद जी की गलती है कि वह फौरन मंच से नहीं उतरे और पेड़ पर नहीं चढ़े.
अगली बार अगर ऐसा होता है तो मैं मुख्यमंत्री जी से कहूंगा कि वह खुद पेड़ पर चढ़ें और उस आदमी को आत्महत्या करने से रोकें लेकिन बाद में एक टीवी चैनल में डिबेट के दौरान मृतक किसान के बेटी के सामने खूब रोये.आशुतोष पत्रकारिता से राजनीति में आने के बाद लगातार सक्रिय रहे. आम आदमी पार्टी के चंद ताकतवर नेताओं में उनकी भी गिनती होती है.
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