[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National बाल ठाकरे की वसीयत पर बंबई हाइकोर्ट में फिर होगी जिरह

बाल ठाकरे की वसीयत पर बंबई हाइकोर्ट में फिर होगी जिरह

0
बाल ठाकरे की वसीयत पर  बंबई हाइकोर्ट में फिर होगी जिरह

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय में जयदेव ठाकरे से 18 जुलाई से जिरह शुरू होगी. जयदेव दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के पुत्र हैं, जिन्होंने एक मुकदमा दायर करके अपने पिता की वसीयत को चुनौती दी है. जयदेव के अपने पिता से तनावपूर्ण रिश्ते थे. न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने आज कहा कि जयदेव से जिरह उनके भाई और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के वकील 18 जुलाई से रोजाना आधार पर करेंगे. जयदेव ने मुकदमा दायर करके अपने पिता की 13 दिसंबर 2011 की वसीयत को चुनौती दी थी. अपनी वसीयत में बाल ठाकरे ने जयदेव को कुछ भी नहीं दिया था.

जयदेव ने अपने पिता की वसीयत को चुनौती दी थी और कहा था कि उनके पिता अस्थिर चित्त के व्यक्ति थे और उद्धव ने उन्हें प्रभावित किया था. यह मुकदमा नवंबर 2012 में बाल ठाकरे की मृत्यु के बाद दायर किया गया था. इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों से कहा था कि वे आपस में मिल बैठकर विवाद का हल निकाल लें लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
अदालत ने अब तक एफ डीसूजा, डॉ. जलील पारकर और शिवसेना नेता अनिल पराब से गवाह के तौर पर जिरह की है. डीसूजा ने अदालत से कहा कि ठाकरे ने अनेक वसीयत बनायीं और सब में लाभार्थी वही लोग थे लेकिन लाभार्थियों को मिलने वाली संपत्तियां बदलती रहीं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel