नयी दिल्ली :राजधानी दिल्ली में एमसीडी की 13 वार्ड पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज सबके सामने आ गए हैं. आज सुबह से जारी मतगणना के बाद आम आदमी पार्टी को 5 सीट, कांग्रेस को 4 सीट ,भाजपा को 3 सीट जबकि 1 सीट निर्दलीय को मिली है.कांग्रेस को 4 सीट मिलने के बाद इसे पार्टी की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा सकता है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में उसे मुंह की खानी पड़ी थी. राजनीतिक जानकारों की माने तो इस जीत का श्रेय पार्टी नेता अजय माकन को दिया जाना चाहिए. उपचुनाव के नतीजों को अगले साल होने वाले एमसीडी चुनाव से पहले सेमीफाइनल की नजर से देखा जा रहा है.
कांग्रेस के लिए मरहम
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के वोट के बाद सोमवार को आये अलग-अलग एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस असम में सत्ता गंवाने जा रही है जबकि केरल की सत्ता भी पार्टी के हाथ से जाती नजर आ रही है ऐसे में दिल्ली एमसीडी का नतीजा कांग्रेस के लिए मरहम का काम करता नजर आ रहा है. यही नहीं दिल्ली के एमसीडी के नतीजों के बाद भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को भी यहां झटका लगा है.वहीं,दिल्ली एमसीडी के चुनाव के नतीजों पर आप ने कहा, एमसीडी में आप की अच्छी शुरूआत हुई है लेकिन हमें उम्मीद से कम सफलता मिली है, नतीजों पर मंथन करेंगे.
‘आप’ के सपने ‘चूर’
विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए आम आदमी पार्टी (आप ) बड़ी जीत की उम्मीद लगाये बैठी थी लेकिन 13 में से उसे मात्र पांच वार्ड पर ही संतोष करना पड़ा. जानकारों की माने तो इन नतीजों के बाद कांग्रेस-भाजपा को एक बार फिर आम आदमी पार्टी पर हमला करने का मौका मिलेगा. दोनों ही पार्टियां आप पर निशाना साधेगी और कहेगी कि उसके एक साल के कामकाज को जनता ने नकार दिया है.
भाजपा के लिए खतरे की घंटी
उप चुनाव के नतीजे ने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. क्योंकि भाजपा कई सालों से एमसीडी पर काबिज है. भाजपा तीनों नगर निगम में सत्ता में है और उसे मात्र तीन वार्ड मिले हैं. अगले साल एमसीडी के चुनाव के मद्देनजर ये नतीजे भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं है. वहीं कांग्रेस ने चार वार्ड जीते हैं जिसकी उम्मीद शायद उसे भी नहीं थी. कांग्रेस लंबे समय से एमसीडी में सत्ता से बाहर है.
