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GST में देरी के लिये सरकार जिम्मेदार: कांग्रेस

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GST में देरी के लिये सरकार जिम्मेदार: कांग्रेस

नयी दिल्ली : कांग्रेस ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर गतिरोध के लिये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के ‘अडियल’ और ‘हठी’ रख को जिम्मेदार ठहराते हुए आज कहा कि गेंद सरकार के पाले में है. साथ ही मुख्य विपक्षी दल ने अर्थव्यवस्था के प्रबंधन के तरीकों को लेकर सत्तारुढ़ गठबंधन की आलोचना की और दावा किया कि अर्थव्यवस्था ‘दलदल में फंस गयी’ है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि 2015 ‘निराशाजनक और नरमी’ के साथ समाप्त हुआ. सरकार के कई वादे ….ज्यादा रोजगार, अधिक निवेश तथा बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास….हकीकत नहीं बन पाये.

उन्होंने कहा, ‘‘….अर्थव्यवस्था दलदल में फंस गयी है.’ कांग्रेस दफ्तर में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बैठक के लिये बुलाया था. बैठक में कांग्रेसी नेताओं ने जीएसटी विधेयक में स्पष्ट रुप से तीन आपत्ति जतायी.
चिदंबरम ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने क्या कहा….हम सरकार के भीतर इस बात पर चर्चा कर आपके साथ फिर बैठक करेंगे. करीब एक महीना होने को है. हमें सरकार की तरफ से लिखित में कोई जवाब नहीं मिला या तीन सैद्धांतिक आपत्तियों पर कोई संशोधित चीजें सामने नहीं आयीं.’ उन्होंने कहा कि गेंद अब पूरी तरह से सरकार के पाले में हैं और अब यह उन पर हैं कि वे हमें बतायें कि वे जीएसटी विधेयक पर हमारी आपत्ति को स्वीकार करते हैं, या वे कुछ संशोधित चीजें ला रहे हैं और या वे उपबंधों को संशोधित कर रहे हैं.
पी चिदंबरम ने आगे कहा कि सरकार विपक्ष के विचारों को को शामिल करने तथा जीएसटी विधेयक पारित कराने का रास्ता निकालने में कामयाब नहीं रही. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बात की चिंता है कि सरकार केवल खुद पर आरोप लगा रही है और उसका रख अडियल और हठी है.’ उन्होंने यह भी कहा कि तीन आपत्तियों में से दो पर मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी एक तरह से अपनी मुहर लगा दी है.
कांग्रेस चाहती है कि जीएसटी दर को लेकर संवैधानिक सीमा हो, वस्तुओं की एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही पर प्रस्तावित एक प्रतिशत कर को वापस लिया जाए तथा विवाद समाधान समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश करें.
उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के बाद शुरु में यह संकेत मिले थे कि सरकार विपक्ष को विश्वास में लेगी और आम सहमति का रख अपनाएगी. चिदंबरम ने कहा कि लेकिन यह उम्मीद बहुत दिन नहीं रही और इसके परिणामस्वरुप कई महत्वपूर्ण विधेयक संसद में अटक गये.
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिये संविधान संशोधन विधेयक को एक बड़ा आर्थिक सुधार माना जा रहा है और लोकसभा ने इसे पारित कर दिया है लेकिन राज्यसभा में यह अटका पड़ा है जहां सत्तारुढ़ दल के पास बहुमत नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथा कुछ अन्य दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर मजबूत आधार के तहत आपत्ति जतायी थी.
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने साफ तौर पर तबतक उपेक्षापूर्ण रख अपनाया हुआ था जबतक मुख्य आर्थिक सलाहकार ने तीन सैद्धांतिक आपत्तियों पर एक तरह से अपनी मुहर नहीं लगा दी और तीसरे के बारे में कोई सिफारिश नहीं की.
अर्थव्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे 2015-16 में आर्थिक वृद्धि दर 7.0- 7.3 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना नहीं है. इसका मतलब है कि 2014-15 के ही स्तर या उससे कम रहेगी. चिदंबरम ने कहा कि मध्यावधि आर्थिक विश्लेषण में खुले तौर पर यह स्वीकार किया गया है कि निजी निवेश एवं निर्यात….मांग के दो चालक…कमजोर हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था एक कार की तरह है जो दो पहियों पर चल रही है. कारपोरेट बैलेंस शीट पर दबाव है, शुद्ध बिक्री 5.3 प्रतिशत घटी और शुद्ध लाभ स्थिर है. गैर-खाद्य रिण 8.3 प्रतिशत है जो 20 साल में सबसे कम है. उद्योग को ऋण की वृद्धि 4.6 प्रतिशत है जबकि मझोले उद्यमों को ऋण वास्तव में 9.1 प्रतिशत कम हुआ है.’ चिदंबरम के अनुसार ऐसा जान पड़ता है कि सरकार को इस बात का भरोसा नहीं है कि वह चालू वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटे के 3.9 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल कर पाएगी.
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