नयी दिल्ली : राज्यसभा में आज एक निजी विधेयक पर मत विभाजन की नौबत एकबार फिर टल गयी क्योंकि सदन को कोरम के अभाव में भोजनावकाश के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया. सदन में आज उस समय एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब सपा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद के निजी विधेयक संविधान .अनुसूचित जातियां. आदेश .संशोधन. विधेयक 2014 पर मतविभाजन की नौबत आ गयी. निषाद ने इस विधेयक पर मतविभाजन की मांग की.
इससे पहले सदन में शुक्रवार होने के कारण गैर सरकारी कामकाज लिया गया तथा कुछ सदस्यों ने अपने निजी विधेयक पेश किये. इस समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष विशेषकर कांग्रेस के कई सदस्य सदन में मौजूद थे.लेकिन जैसे ही निषाद के विधेयक का उपसभापति पी जे कुरियन ने नाम लिया तो धीरे धीरे कांग्रेसस के सभी सदस्य सदन से चले गये. सत्ता पक्ष की पंक्तियां भी लगभग खाली हो गयीं.
कुरियन ने सदन को सूचित किया कि निषाद के विधेयक पर चर्चा पूरी हो चुकी है तथा संबंधित मंत्री का हस्तक्षेप भी हो गया है. अब यदि निषाद चाहें तो इस विधेयक को वापस ले सकते हैं. किन्तु निषाद ने यह विधेयक वापस लेने के बजाय मत विभाजन की मांग कर दी.
निषाद के यह मांग करने पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने स्वयं खडे होकर सदन में कोरम नहीं होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि कोरम के अभाव में मतविभाजन नहीं हो सकता उपसभापति कुरियन ने स्वीकार किया कि सदन में कोरम पूरा नहीं है. उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान में स्पष्ट उल्लेख है कि ऐसी स्थिति में सदन को दिन भर के लिए या कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता है. इस मामले में वह पहले विकल्प को चुन रहे हैं. इसके बाद उन्होंने दोपहर करीब दो बजकर 40 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी.
