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पाकिस्तान में नहीं है दाउद : बासित

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पाकिस्तान में नहीं है दाउद : बासित

बेंगलुरु : भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने बुधवार को जोर देकर कहा कि फरार माफिया सरगना दाउद इब्राहिम को उनके देश ने नहीं छुपा रखा है. थिंक टैंक बेंगलौर इंटरनेशनल सेंटर और तक्षशिला इंस्टीट्यूट द्वारा यहां आयोजित एक समारोह के दौरान बासित ने कहा, ‘‘ वह पाकिस्तान में नहीं है. यहां तक कि आपकी सरकार को भी उसके पते ठिकाने की पुख्ता जानकारी नहीं है.” उन्होंने कहा, ‘‘ यदि आपके पास दाउद के बारे में कोई जानकारी है तो बताएं।” इस सवाल पर कि पाकिस्तान जमात उद दावा को कैसे देखता है , बासित ने कहा कि यह एक परमार्थ संस्था है लेकिन यदि कोई उचित कारण पाया जाता है तो उस पर रोक लगायी जाएगी.’

बासित ने कहा, ‘‘ कुल मिलाकर यह एक परमार्थ संगठन है. फिर भी हमारी चिंताएं हैं और हम करीब से नजर रखे हुए हैं. यदि कोई कारण पाया जाता है तो उस पर रोक लगायी जाएगी.” इससे पूर्व अपनी बात रखते हुए बासित ने कहा कि चूंकि भारत बडा देश है तो हिंसा को समाप्त करने की उसके कंधों पर अधिक जिम्मेदारी है और पाकिस्तान ईमानदारी तथा गंभीरता के साथ इस लक्ष्य के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है. उन्होंने कहा, ‘‘ पाकिस्तान में 35 सालों की हिंसा के बाद , आतंकवाद के हाथों इतना झेलने के बाद एक थकान सी आ गयी है. हम वास्तव में चाहते हैं कि हिंसा समाप्त हो और हम गंभीरता तथा ईमानदारी से भारत के साथ काम करने को तैयार हैं लेकिन भारत एक बडा देश है और इसलिए इसके कंधों पर अधिक जिम्मेदारी है.”

बासित ने कहा कि पाकिस्तान को छोटा करके नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि दोनों देशों के संबंध आपसी हित और सम्मान पर आधारित होने चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते हमारे साथ छोटेपन का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए बल्कि अंतत: हमारे जो भी संबंध हों वे आपसी हित और आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए।” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि उनके देश के अनुकूल माहौल का इस्तेमाल किया जाए जब उनके देश में लोकतंत्र का वजूद बना हुआ है. बासित ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच मुख्य विवाद है तथा दोनों देशों को सालों की कडवाहट को एक दूसरे के हित साधक के रुप में बदलना चाहिए और सिविल सोसायटी द्वारा इस दिशा में योगदान किए जाने से ही यह हो सकता है. उच्चायुक्त ने कहा, ‘‘ कोई इसे पसंद करे या नहीं करे. जम्मू कश्मीर हमारे दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद बना हुआ है और यह आपसी दुश्मनी को दूर नहीं होने देता.” बासित ने कहा, ‘‘ हम सालों से बात कर रहे हैं और अब हमें यह देखना होगा कि सालों की कडवाहट को एक दूसरे के हित साधक में कैसे बदला जाए.

ऐसा तभी हो सकता है जब दोनों देशों की सिविल सोसायटी इस दिशा में योगदान करें क्योंकि दोनों ही ओर बहुसंख्यक लोग केवल शांति चाहते हैं.” बासित ने कहा कि एक पेचीदा मुद्दे को किसी स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने में सालों लग सकते हैं लेकिन अन्य मामलों को बातचीत के जरिए आगे बढाया जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ एक तत्व हैं जो नहीं चाहते कि दोनों देश आगे बढें लेकिन बहुसंख्यक लोग शांति चाहते हैं.” बासित ने कहा कि उनका देश अफगानिस्तान के साथ भी हिंसा को समाप्त करना चाहता है क्योंकि काबुल पाकिस्तान के बेहद महत्वपूर्ण राजधानी है. उन्होंने दोनों देशों के बीच कारोबार में सुधार तथा दक्षेस में नई जान डालने की वकालत की जिसकी 19वीं शिखर बैठक अगले साल पाकिस्तान में होगी.

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