नयी दिल्ली : ऐसा लगता है कि ‘वन रैंक, वन पेंशन’ के मुद्दे पर पूर्व सैनिकों और सरकार ने अपने बड़े मतभेद सुलझा लिए हैं. इन अटकलों ने तब जोर पकड़ा जब पूर्व सैनिकों ने आज रात कहा कि वे हर साल पेंशन की समीक्षा की अपनी मांग की बजाय हर दो साल पर पेंशन की समीक्षा को स्वीकार कर सकते हैं.
पिछले 80 दिनों से जंतर मंतर पर ‘वन रैंक, वन पेंशन’ के मुद्दे पर जारी प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे और युद्ध में हिस्सा ले चुके सेवानिवृत मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें सरकार से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह बात नहीं कही कि सरकार से बातचीत में कोई सफलता मिली है.
सिंह ने कहा कि यह मुद्दा तोल-मोल वाला नहीं है और ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की अवधारणा के दोनों तत्वों में दखल नहीं दिया जा सकता. उन्होंने कहा कि एक बार हमें यह पता चल जाए कि सरकार क्या पेशकश करने वाली है, तभी हम किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं. उन्होंने कहा कि समीक्षा की तारीख निश्चित तौर पर एक अप्रैल 2014 से होनी चाहिए.
