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Home National लालकृष्ण आडवाणी आईसी-814 के बंधकों के लिए आतंकियों को रिहा करने के पक्ष में नहीं थेः फारूक अब्दुल्ला

लालकृष्ण आडवाणी आईसी-814 के बंधकों के लिए आतंकियों को रिहा करने के पक्ष में नहीं थेः फारूक अब्दुल्ला

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लालकृष्ण आडवाणी आईसी-814 के बंधकों के लिए आतंकियों को रिहा करने के पक्ष में नहीं थेः फारूक अब्दुल्ला

नयी दिल्लीः कंधार विमान अपहरण मामले में नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया है कि वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी विमान यात्रियों के बदले आतंकियों को रिहा करने के लिए तैयार नहीं थे. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने दावा किया कि आडवाणी आईसी-814 के बंधकों के बदले आतंकियों को रिहा नहीं करना चाहते थे, लेकिन बाद में शायद उन्हें जबरदस्ती इसके लिए मना लिया गया.

एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, अब्दुल्ला ने एक पुस्तक विमोचन के दौरान यह दावा किया. कार्यक्रम के दौरान फारूक जोर देते रहे कि नई दिल्ली को कश्मीरी अवाम पर भरोसा करने की जरूरत है.उन्होंने कहा कि देश को आतंकवाद से लड़ाई की कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना ही था. लालकृष्ण आडवाणी से अपनी बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आडवाणी आतंकियों को रिहा करने के खिलाफ थे.

फारूक अब्दुल्ला भी कंधार विमान अपहरण कांड में विमान यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के बदले आतंकियों को छोड़ने के फैसले का विरोध किया था. उस वक्त उन्होंने यहां तक कहा था कि आतंकवादी यदि मेरी बेटी का अपहरण करते तो भी मैं एक आतंकी रिहा नहीं करता. आज फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जिनको पकडने में हमे कितनी मुश्किलों का सामना करना पडा उसे इतनी आसानी से कैसे छोड दिया जाय.

उन्होंने कहा कि क्या वतन इतना कमजोर है कि वह आतंकवाद से लड नहीं सकता. उन्होंने कहा कि मेरी आत्मा कभी यह कबूल नहीं कर सकती कि आतंकियों को रिहा कर दिया जाय. यह सवाल पूछे जाने पर की दिल्ली में बंधकों की रिहाई के लिए धरने प्रदर्शन शुरु हो गये थे और सरकार पर दबाव बढ गया था. इस पर उन्होंने कहा कि धरने प्रदर्शन तो रोज होते हैं लोग रोज मर रहे हैं तो इससे क्या. हमें आतंकियों से कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए. हमने समझौता किया उसका खामियाजा देश को भुगतना पडा और अभी भी भुगत रहा है.

अब्दुल्ला ने कहा कि 1999 के कंधार विमान अपहरण और 1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद अपहरण मामले में आतंकियों को छोड़ने का फैसला केंद्र सरकार ने किया था और ऐसा जम्मू-कश्मीर सरकार की राय को किनारे रखकर किया गया. अब्दुल्ला ने दावा किया दोनों घटनाओं के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में तेजी आई.

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