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नेपाल के पुनर्निर्माण में एक अरब डॉलर की मदद करेगा भारत

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नेपाल के पुनर्निर्माण में एक अरब डॉलर की मदद करेगा भारत

काठमांडो : भारत ने भूकंप से तबाह नेपाल को उसके व्यापक पुनर्निर्माण कार्यक्रमों के लिए एक अरब डॉलर की मदद देने का वादा करते हुए जोर दिया कि प्रत्येक नेपाली नागरिक के आंसू पोछने में वह नेपाल सरकार के साथ मजबूती से खडा रहेगा.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेपाल की मदद के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसकी घोषणा की. सुषमा स्वराज ने उम्मीद जतायी कि तबाही के मंजर से एक मजबूत, अखंड तथा और ज्यादा विश्वस्त नेपाल फिर खडा होगा.

उन्होंने कहा कि एक अरब डॉलर की सहायता दी जायेगी जिसमें से एक चौथाई हिस्सा अनुदान होगा. उन्होंने कहा कि यह भारत के मौजूदा द्विपक्षीय विकास सहयोग के तहत अगले पांच साल तक एक अरब डॉलर की मदद के अतिरिक्त होगा. इस तरह कुल दो अरब डॉलर की मदद मिलेगी.

सुषमा स्वराज ने नेपाल के पुनर्निर्माण के प्रति भारत की ‘गहरी और वचनबद्ध प्रतिबद्धता’ जतायी और उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अप्रैल को 7.9 तीव्रता के भूकंप के छह घंटे के भीतर राहत और बचाव अभियान शुरु किया जाना सुनिश्चित किया था.

उन्होंने कहा, ‘ आज मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडा होने के साथ ही हरेक नेपाली के आंसू पोछने की सरकार की गहरी और वचनबद्ध प्रतिबद्धता तथा 1.25 अरब भारतवासी एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी प्रतिबद्धता से आपको अवगत कराना चाहती हूं.’ उन्होंने कहा कि नेपाल के साथ गहरी सहानुभूति, समर्थन और एकजुटता रही है और भारत में लोग देश की सहायता के लिए खुले दिल से तैयार हैं.

नेपाल सरकार ने 25 अप्रैल को आए भीषण भूकंप के ठीक दो महीने बाद फंड जुटाने के लिए देश के पुनर्निर्माण के वास्ते एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है. भूकंप के कारण करीब 9,000 लोगों की मौत हो गयी और 23,000 लोगों के घायल होने के साथ ही पांच लाख घर जमींदोज हो गये.

स्वराज ने कहा,’ भूकंप पश्चात नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार की तरफ से एक अरब डॉलर यानि 10,000 करोड नेपाली रुपये की मदद की घोषणा कर मुझे खुशी हो रही है.’ सम्मेलन में चीन, ब्रिटेन, नार्वे, जापान, श्रीलंका सहित कई देशों के साथ ही यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक ने भागीदारी की.

स्वराज ने कहा, ‘ मैं नेपाल के लोगों की जीवटता को सलाम करती हूं और एक बार फिर भारत के पूर्ण सहयोग का भरोसा देती हूं. भीषण त्रासदी और इसके बाद ऑफ्टरशाक्स भी नेपाली लोगों के मनोबल को तोड नहीं पाया.’ उन्होंने कहा, ‘ मैं भरोसा और प्रतिबद्धता देख रही हूं क्योंकि वे अपनी और अपने समुदायों की जिंदगी फिर पटरी पर लाना चाहते हैं. हर चुनौती एक अवसर की तरह है. प्रतिकूलता मजबूत बनाती है. निस्संदेह, तबाही के मलबे से एक मजबूत, एकजुट तथा और ज्यादा आश्वस्त नेपाल खडा हो सकेगा.’

इस पर जोर देते हुए कि दुनिया ने पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाया, यह समान, बडे उद्देश्य के लिए साथ आने का प्रतीक है, स्वराज ने कहा, ‘आज हमें योग के प्राचीन दर्शन से प्रेरणा लेना है तथा और ज्यादा मजबूत नेपाल के लिए हाथ मिलाना है.’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया ‘त्वरित, स्वत:र्स्फूत’ थी क्योंकि उसकी राहत टीम भूकंप के छह घंटे के भीतर ही नेपाल पहुंच गयी.

उन्होंने कहा, ‘ चार अरब भारतीय रुपये मूल्य की ऑपरेशन मैत्री विदेश में अब तक की हमारी सबसे बडी त्रासदी सहायता थी. लेकिन, सबसे जो महत्वपूर्ण है वह यह नहीं कि दूसरे देशों की तुलना में बडा समर्थन दिया, मायने यह है कि नेपाली भाइयों और बहनों के लिए भारतीयों की हमदर्दी, तात्कालिक, स्वाभाविक और दिल से की गयी मदद थी.’

नेपाल के समक्ष फंड का कुशल और पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित किये जाने की चुनौतियों का जिक्र करते हुए स्वराज ने कहा कि भारत नेपाल सरकार के साथ निकटता से काम करता रहेगा. उन्होंने 200 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर भूकंप के बाद की स्थिति पर समग्र आकलन तैयार करने के लिए नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग को भी बधाई दी.

उल्लेख करते हुए कि प्रधानमंत्री मोदी का दो बार नेपाल का दौरा द्विपक्षीय सहयोग की अहमियत को बताता है, स्वराज ने कहा, ‘पनबिजली परियोजनाएं को तेजी से लागू किये जाने की जरुरत है और काठमांडो-निजगढ का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और निजगढ एयरपोर्ट के साथ भारत की भागीदारी तेज होनी चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘ इन परियोजनाओं से रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे जिससे यह राजस्व तथा दीर्घावधि रिकवरी में योगदान करेगा.’

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