आपको बता दें यह मामला वर्ष 2005 का है जब बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को ओडिशा के तालाबीरा द्वितीय और तृतीय में कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे. उस वक्त कोयला मंत्रालय का प्रभार पूर्व प्रधानमंत्री के पास था. दिसंबर में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और जांच की जरूरत पर बल देते हुए तत्कालीन प्रधामंत्री का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था.
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 25 नवंबर को सुनवाई के दौरान स्पेशल सीबीआई जज ने मनमोहन सिंह से पूछताछ के सबंध में सवाल खडे किये. कोर्ट ने पूछा था कि उसने कोयला घोटाले के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछताछ क्यों नहीं की, जबकि हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटित किए जाने के वक्त 2005-09 के दौरान सिंह ही कोयला मंत्री भी थे.
