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Home National मैं 4000 किमी लंबे भारत-चीन सीमा वार्ता की जमीन तैयार करने चीन आयी हूं : सुषमा स्वराज

मैं 4000 किमी लंबे भारत-चीन सीमा वार्ता की जमीन तैयार करने चीन आयी हूं : सुषमा स्वराज

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मैं 4000 किमी लंबे भारत-चीन सीमा वार्ता की जमीन तैयार करने चीन आयी हूं : सुषमा स्वराज
बीजिंग : चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने गरमजोशी और दोस्ती का दुर्लभ प्रदर्शन करते हुए भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का आज यहां भव्य ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में स्वागत किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच हाल में हुए समझौतों और आपसी सहयोग को लागू करने की दिशा में चीन और भारत ने ठोस कदम उठाए हैं.
भारत की अपनी हाल की यात्र का स्मरण करते हुए उन्होंने सुषमा से कहा, ‘‘मुङो चीन एवं भारत के रिश्तों के भविष्य पर पूरा विश्वास है और मेरा मानना है कि इस साल द्विपक्षीय रिश्तों के विकास में अच्छी प्रगति हासिल होगी.’’ चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी भारत यात्र के बाद दोनों देशों केरिश्तों ने एक नए दौर में प्रवेश किया है और सकारात्मक पक्ष यह है कि चीन एवं भारत के रिश्ते आगे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने कहा कि चीन-भारत संबंधों का सकारात्मक पक्ष विकसित हो रहा है और उनके और मोदी के बीच हुए समझौतों के कार्यान्वयन के लिए उठाए गए ठोस कदमों के साथ दोनों देशों के सहयोग की गति तेज हो गयी है.
दोनों देशों ने जून तक सिक्कम के रास्ते तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्र के लिए दूसरा मार्ग खोलने के तौर तरीकों को लेकर कल दस्तावेजों का आदान प्रदान किया. यह दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए ठोस कदमों में से एक है. इससे भारतीयों की कठिन कैलाश मानसरोवर यात्र आसान हो सकेगी.
शी ने पिछले साले अपने पहले भारत दौरे में मोदी से नया रास्ता खोलने का वादा किया था. अपने भारत दौरे की यादें साझा करते हुए शी ने सुषमा से कहा, ‘‘मैं भारत सरकार और लोगों के शालीन आतिथ्य की यादें संजोए हुए हूं विशेषकर गुजरात राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर के दौरे की यादें अब भी मेरे मन में ताजा हैं.’’
चीन के राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री खुद दौरे में मेरे साथ थे. कृपया स्वदेश लौटने पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मोदी को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं कहें.
शी के गर्मजोशी से भरे शब्दों का जवाब देते हुए सुषमा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस महीने के आखिर में शुरू होने वाले चीनी नववर्ष (लूनर ईयर ऑफ शीप) के लिए उन्हें शुभकामनाएं भेजी हैं.
सुषमा ने कहा, ‘‘मुङो बताया गया है कि लूनर ईयर ऑफ शीप को रचनात्मकता एवं नवाचार का वर्ष माना जाता है. मुङो लगता है कि आपका (शी का) भारत दौरा रचनात्मकता और नवाचार से जुड़ा था.’’ उन्होंने साथ ही कहा कि भारत एवं चीन के बीच रिश्ते बेहतर करने के लिए नए रास्ते तैयार किए गए हैं.
चीन के राष्ट्रपति द्वारा किसी विदेशी मंत्री की आगवानी करना एक दुर्लभ अवसर है और अधिकारियों का कहना है कि इससे चीनी नेता के भारत के प्रति गर्मजोशी एवं दोस्ताना रुख का पता चलता है. सुषमा 31 जनवरी को चीन के दौरे पर पहुंची थीं। इससे पहले उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ गहन बातचीत के बाद कहा था कि मई में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी चीन का एक ‘ठोस नतीजों से परिपूर्ण’ दौरा करेंगे.
अधिकारियों ने कहा कि शी भारतीय प्रधानमंत्री के गृह राज्य में मिले अपने शानदार आतिथ्य को देखते हुए मोदी को अपने गृह प्रांत शांक्शी और उसके ऐतिहासिक शहर शियान के दौरे पर ले जा सकते हैं. शियान के भारत के साथ प्राचीन बौद्ध संबंध हैं.
विदेश मंत्री ने कल कहा था कि उनके दौरे का उद्देश्य मोदी की यात्र की तैयारियां करना और दोनों देशों के सीमा विवाद के हल के लिए 18वें दौर की भारत-चीन सीमा वार्ता की जमीन तैयार करना है. चीन का कहना है कि सीमा विवाद 2,000 किलोमीटर क्षेत्र तक सीमित है जिसका अधिकतर हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है, जबकि भारत के अनुसार सीमा का पश्चिमी हिस्सा सीमा विवाद के दायरे में आता है जो 4,000 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है.
दोनों देश सीमा विवाद के हल के लिए अब तक 17 दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता कर चुके हैं. पिछले साल शी की ऐतिहासिक भारत यात्र के दौरान उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत में भी यह मुद्दा शामिल था. दोनों देश जल्द से जल्द सीमा विवाद के हल के लिए प्रयास करने के लिए सहमत हुए थे.
सुषमा ने कहा कि उनकी यात्र का उद्देश्य चीन द्वारा की गयी विभिन्न प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया की समीक्षा करना है. चीन की इन प्रतिबद्धताओं में भारत में दो औद्योगिक पार्क में 20 अरब डॉलर का निवेश और भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के लिए सहयोग करना शामिल है.
भारत साथ ही पिछले साल 70 अरब डॉलर से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार में हुए 38 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को पाटने के उपाय के तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी, दवा एवं कृषि वस्तुओं के लिए चीनी बाजार को खोलने की मांग कर रहा है.
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