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गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने काफी विधायी कार्यो का एजेंडा रखा

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गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने काफी विधायी कार्यो का एजेंडा रखा

नयी दिल्ली: साध्वी निरंजन ज्योति मामले पर जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस सप्ताह संसद में काफी विधायी कार्यो का एजेंडा रखा है जिसमें कोयला ब्लाक आवंटन से जुडे अध्यादेश के स्थान पर विधेयक लाना शामिल हैं.

इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के मद्देनजर आध्यादेश लाया गया था जिसके चलते सितंबर में 214 कोयला ब्लाक के आवंटन को रद्द कर दिया गया था.सरकार ने अक्तूबर में कोयला खान (विशेष प्रावधान) अध्यादेश 2014 में पेश किया था ताकि रद्द कोयला ब्लाक की नीलामी को सुगम बनाया जा सके. कोयला अध्यादेश का हालांकि, आरएसएस से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ समेत अन्य मजदूर संघ विरोध कर रहे हैं.
बीएमएस, एआईटीयूसी, सीटू, एचएमएस और आईएनटीयूसी ने संयुक्त रुप से सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें कोयला खनन और खुले बाजार में ब्रिकी के लिए निजी कंपनियों को अनुमति देने का प्रस्ताव है. यह अधिकार अभी तक सरकारी स्वामित्व वाले कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास है. अध्यादेश की वाम दलों ने भी आलोचना की है.
संसद में कामकाज के एजेंडे में कपडा उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) कानून (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) आध्यादेश 2014 के स्थान पर विधेयक लाना भी है. यह अध्यादेश राष्ट्रीय कपडा निगम को किराया नियंत्रण कानूनों से बचाने के लिए लाया गया है.
एंटी हाइजैंकिंग बिल और अनुदान की अनुपूरक मांग और संबंधित विनियोग विधेयक भी एजेंडे में प्राथमिकता में है. इसके अलावा भुगतान एवं निपटारा प्रणाली (संशोधन) विधेयक 2014 और विनियोग कानून (निरसन)विधेयक 2014 भी एजेंडे में शामिल है.
राज्यसभा में कई वह विधेयक लिये जायेंगे जो व्यवधान के कारण दूसरे सप्ताह नहीं लिये जा सके थे.इसमें अध्यादेश के स्थान पर कपडा उपक्रम :राष्ट्रीयकरण: कानून (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक 2014, संविधान के अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक 2014, केंद्रीय विश्वविद्यालय विधेयक 2014 और योजना एवं वास्तुकला विधेयक 2014 शामिल है जो लोकसभा में पहले ही पारित हो चुके हैं.
संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे सप्ताह में लोकसभा ने चार विधेयक पारित किये और एक अन्य पर चर्चा अधूरी रही.लोकसभा में पहले दो सप्ताह में नौ विधेयक पारित हुए जबकि राज्यसभा में छह विधेयकों को मंजूरी मिली. व्यवधान के कारण उच्च सदन में हालांकि कृषक संकट, डब्ल्यूटीओ वार्ता पर सरकार के बयान जैसे विषयों एवं शमशाबाद हवाई अड्डे के नामाकरण पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी.
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