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प्रधानमंत्री ने चाय पर मांगा मंत्रियों से कामकाज का हिसाब

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प्रधानमंत्री ने चाय पर मांगा मंत्रियों से कामकाज का हिसाब
नयी दिल्ली : खुद का चाय वाला बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एनडीए सांसदों व मंत्रियों को शाम में चाय पिलायी. चाय पिलाने के साथ-साथ पीएम ने मंत्रियों से उनके कामकाज का हिसाब भी लिया. भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी ने चाय पार्टी के बाद मीडिया को बताया कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जनधन योजना के बारे में पीएम को प्रजेंटेशन दिया, जबकि नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के बारे में ब्योरा पेश किया. नरेंद्र सिंह तोमर ने श्रम मंत्रलय के बारे में पीएम को प्रजेंटेशन दिया. इसी तरह दूसरे मंत्रियों ने भी पीएम को अपने-अपने कामकाज का ब्योरा दिया. साथ ही पीएम ने मंत्रियों से यह भी पूछा कि वे भविष्य में क्या कदम उठाने जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों सांसदों को गरीबों के लिए कल्याण के लिए काम करने को कहा. साथ ही यह भी कहा कि वे अपने मंत्रलय के माध्यम से गरीबी खत्म करने के लिए कार्य करें. उन्होंने सांसदों को भी गरीबों के लिए काम करने को कहा. प्रधानमंत्री ने मुलाकात में स्वच्छता अभियान पर खुशी भी प्रकट की. इस बैठक के माध्यम से सांसद सरकार की कार्ययोजनाओं और नीतियों से अवगत हो सके.चाय परभाजपा के अध्यक्ष अमित शाह सहित पार्टी पदाधिकारी भी पहुंचे हैं.
नहीं पहुंचे उद्धव, महाराष्ट्र पर टिकी नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एनडीए सांसदों को दी गयी चाय पार्टी में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे नहीं पहुंचे. हालांकि पीएम के आधिकारिक आवास सात रेसकोर्स रोड पर आयोजित इस पार्टी में शिवसेना के सांसद पहुंचे थे. भले ही इस चाय पार्टी को दीवाली के उपलक्ष्य में पीएम की एक पहल और मंत्रियों के कामकाज के ब्योरा से जोड़ कर देखा जा रहा हो, पर इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं. समझा जाता है कि यह इस चाय पार्टी में भाजपा और शिवसेना के भावी संबंधों की रूपरेखा तय हो गयी.
भले ही पीएम मोदी ने दिल्ली में एनडीए सांसदों को चाय पिलायी हो, पर इसका असर मुंबई में महसूस किया जा रहा है. इस चाय पार्टी पर महाराष्ट्र में बनने वाली भावी सरकार में अपनी हिस्सेदारी की आस लगाये बैठे शिवसेना की नजरें टिकी रहीं. शिवसेना खेमे से उद्धव के पीएम की चाय पार्टी में शामिल होने के संबंध में मिश्रित खबरें आती रही हैं. पहले खबर आयी कि पीएम की पार्टी में उद्धव शामिल होंगे, फिर कहा गया कि वे उस पार्टी में शामिल नहीं होंगे. इसके प्रतीकात्मक मायने हैं.
समझा जाता है कि पीएम मोदी भाजपा-शिवसेना की राजनीति व संबंधों का केंद्र व धुरी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को बनाना चाहते हैं, लेकिन ठाकरे अब भी उसका केंद्र मुंबई को ही बनाये रखने की जद्दोजहद में लगे हैं. दोनों दलों के बीच चुनाव बाद भी नाक की लड़ाई जारी है.
ऐसे में भाजपा-शिवसेना के सरकार गठन पर साथ आने का सवाल अब भी उलझा हुआ है. इस बीच सोमवार को भाजपा विधायक दल की कल मुंबई में बैठक होने वाली है. समझा जाता है कि इसमें भाजपा अपना भावी मुख्यमंत्री चुन सकती है और फिर सरकार गठन के लिए राज्यपाल के पास दावेदारी पेश कर सकती है. अगर शिवसेना साथ नहीं आती है, तो फिलहाल अल्पमत सरकार राज्य में गठित होगी और बाद में भाजपा विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करेगी.
देश की राजनीति में अहम रही है चाय पार्टी
भारत की राजनीति में हाइ-प्रोफाइल टी पार्टी अहम रही है. एक बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व जे जयललिता के बीच चाय के दौरान बैठक हुई थी, जिसके बाद केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार गिर गयी थी. उसी तरह सोनिया गांधी व बसपा प्रमुख मायावती के बीच भी चाय के दौरान मुलाकात हुई है, जिसके बाद केंद्र में कांग्रेस की सरकार को समर्थन मिला. बाद में मायावती को भी भ्रष्टाचार के आरोपों से राहत मिली.
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