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अब कोल ब्‍लॉकों की होगी इ- नीलामी

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अब कोल ब्‍लॉकों की होगी इ- नीलामी

नयी दिल्ली : कोयला क्षेत्र में सुधारों की दिशा में बड़ी पहल करते हुए केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों को खुद के इस्तेमाल के लिए कोल ब्लॉकों की ई-नीलामी और राज्यों व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को सीधे ब्लॉक आवंटित करने के लिए अध्ययादेश जारी करने की सिफारिश की. सरकार ने यह निर्णय 1993 के बाद आवंटित 214 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के पिछले माह लिए गये फैसले के मद्देनजर लिया है.

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रद्द किये गये ब्लॉकों के आवंटन में सरकारी कंपनियों को प्राथमिकता मिलेगी. एनटीपीसी और राज्य बिजली बोडरें जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कोयला खानों का आवंटन किया जायेगा. आवंटन की प्रक्रि या तीन से चार महीने में पूरी कर ली जायेगी. यह पूरी तरह पारदर्शी होगी.

निजी क्षेत्र के लिए पूल

निजी क्षेत्र के सवाल पर उन्होंने कहा कि सीमेंट, इस्पात और बिजली क्षेत्र में कोयले का वास्तविक रूप से उपयोग करने वाली आवेदनकर्ता इकाइयों के लिए कुछ खाने पूल में रखी जायेंगी. इनके लिए ई नीलामी की जायेगी.

आय संबंधित राज्यों को

ई-नीलामी में उपयुक्त संख्या में खानों को रखा जायेगा, ताकि वास्तविक उपयोगकर्ताओं को खान मिल सके. इस प्रक्रिया से प्राप्त आय पूरी तरह उन राज्यों को जायेगी जिनमें ये खानें स्थित होंगी.

इन राज्यों को फायदा : इस फैसले से झारखंड, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ आदि राज्यों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश को भी इसका लाभ मिलेगा.

क्या हैं शर्ते

कोयला मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से गहन विचार- विमर्श के बाद अध्यादेश का मसौदा तैयार किया है. सूत्रों ने बताया कि जिन आवंटियों के कोल ब्लॉक रद्द हुए हैं, वे नीलामी में भाग लेने के पात्र होंगे. सिर्फ वे कंपनियां नीलामी में हिस्सा नहीं ले पायेंगी, जो कोयला संबंधित मामलों में आरोपी हैं. ई-नीलामी में उन्हीं विदेशी कंपनियों को अनुमति मिलेगी जो भारत में पंजीकृत हैं. नीलामी के लिए रिजर्व मूल्य एक समिति द्वारा तय किया जायेगा. इसमें पहले इनकार का किसी को अधिकार नहीं होगा.

क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 1993 से विभिन्न कंपनियों को आवंटित 218 में से 214 ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया है. इसके अलावा कोर्ट ने केंद्र को ऐसे 42 ब्लॉकों का परिचालन अपने हाथ में लेने की अनुमति दी है जिनमें कारोबार शुरू हो चुका है.

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